Friday, November 6, 2026

EWS प्रमाणपत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DSSSB की विशेष अनुमति याचिका खारिज की; शिक्षक अभ्यर्थी के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

 


EWS प्रमाणपत्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DSSSB की विशेष अनुमति याचिका खारिज की; शिक्षक अभ्यर्थी के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने समय रावत के पक्ष में दिए गए दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया; कोविड-19 महामारी के दौरान EWS प्रमाणपत्र प्राप्त करने में देरी के कारण अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट ने रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने संबंधी DSSSB की दलील खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश का छह सप्ताह के भीतर पालन करने का निर्देश दिया था।

नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026

सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) और अन्य अधिकारियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है।

यह मामला एक शिक्षक अभ्यर्थी की उम्मीदवारी से संबंधित था, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान निर्धारित समय-सीमा के भीतर EWS प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं कर पाने के कारण अस्वीकार कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 22 सितंबर 2025 को पारित आदेश में दिल्ली हाई कोर्ट के 3 अप्रैल 2025 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

यह आदेश दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) एवं अन्य बनाम समय रावत, SLP (Civil) Diary No. 44986/2025 में पारित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ करते हुए कहा कि वह हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने का इच्छुक नहीं है। तदनुसार, विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई।

इस आदेश के परिणामस्वरूप केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा अभ्यर्थी के पक्ष में दिए गए निर्देशों को बरकरार रखने वाला दिल्ली हाई कोर्ट का निर्णय यथावत बना हुआ है।

निर्धारित तिथि तक EWS प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर उम्मीदवारी खारिज

मामला DSSSB द्वारा 12 मई 2021 को जारी विज्ञापन संख्या 02/21 से संबंधित है, जिसके अंतर्गत दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में विभिन्न शिक्षण पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

समय रावत ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT), प्राकृतिक विज्ञान (महिला), पद कोड 36/21, के लिए EWS श्रेणी के अंतर्गत आवेदन किया था।

आवेदन की अंतिम तिथि पहले 24 जून 2021 निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 4 जुलाई 2021 कर दिया गया।

अभ्यर्थी के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन और प्रतिबंधों के कारण निर्धारित समय के भीतर EWS प्रमाणपत्र प्राप्त करना संभव नहीं हो सका।

DSSSB ने इस आधार पर अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज कर दी कि उनका EWS प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तिथि या उससे पहले जारी नहीं हुआ था।

इस निर्णय से व्यथित होकर अभ्यर्थी ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष मूल आवेदन संख्या 1534/2022 दायर किया और अपनी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार तथा EWS श्रेणी के अंतर्गत नियुक्ति के लिए विचार किए जाने की मांग की।

CAT ने अभ्यर्थी को दी राहत

22 मई 2024 को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की पीठ, जिसमें न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य आनंद एस. खाती शामिल थे, ने समय रावत के मूल आवेदन का निस्तारण करते हुए समान परिस्थितियों वाले अन्य EWS अभ्यर्थियों के मामलों में दिए गए निर्देशों का लाभ प्रदान किया।

अधिकरण ने अंजू एवं अन्य बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार एवं अन्य, O.A. No. 1524/2022 तथा संबंधित मामलों में 8 अगस्त 2023 को दिए गए निर्णय पर भरोसा किया।

उस निर्णय में अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जिन अभ्यर्थियों के पास उनकी आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति के आधार पर जारी वैध EWS प्रमाणपत्र हैं, उनकी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार किया जाए।

अधिकरण ने स्पष्ट किया था कि यदि पुनः जांच में अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी नियमानुसार सही पाई जाती है, तो उनकी मेरिट, संबंधित पद और भर्ती नियमों के अनुसार नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया था कि अभ्यर्थियों को परिणामी लाभ काल्पनिक आधार (Notional Basis) पर दिए जाएंगे, जबकि वास्तविक आर्थिक लाभ उनकी नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्राप्त होंगे।

इन्हीं निर्देशों का लाभ समय रावत को भी प्रदान किया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने DSSSB की याचिका खारिज की

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए DSSSB ने दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष W.P.(C) No. 15356/2024 दायर की।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की खंडपीठ ने 3 अप्रैल 2025 को DSSSB की रिट याचिका खारिज कर दी।

DSSSB का तर्क था कि अभ्यर्थी निर्धारित अंतिम तिथि तक EWS प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी थी और इसलिए उसे नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।

इसके अतिरिक्त DSSSB ने यह भी दलील दी कि वर्तमान में कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है, जिस पर अभ्यर्थी को नियुक्त किया जा सके।

हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

न्यायालय ने कहा कि समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों से संबंधित विवाद पर हाई कोर्ट पहले ही निर्णय दे चुका है।

इस संदर्भ में न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार एवं अन्य बनाम ऋषिकेश शर्मा तथा संबंधित मामलों में 22 मई 2024 और 19 जुलाई 2024 को पारित आदेशों का उल्लेख किया।

पीठ बदलने से पहले तय हो चुके कानूनी विवाद दोबारा नहीं खोले जा सकते

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कानूनी विवाद पर न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुका हो, तो केवल न्यायिक पीठ की संरचना बदल जाने के कारण उसी विवाद को दोबारा नहीं खोला जाना चाहिए।

न्यायालय ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि पहले दिए गए आदेशों का DSSSB द्वारा आंशिक रूप से पालन किया जा चुका था।

इस प्रकार, न्यायालय ने उन प्रश्नों पर पुनः विचार करने से इनकार कर दिया जो पहले ही समान मामलों में तय किए जा चुके थे।

रिक्त पद नहीं होने की दलील से न्यायिक राहत समाप्त नहीं की जा सकती

इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण पहलू DSSSB की यह दलील थी कि अभ्यर्थी को समायोजित करने के लिए वर्तमान में कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं है।

हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

न्यायालय ने अपने 19 जुलाई 2024 के पूर्व आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े होने की बात पहले ही दर्ज की जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब कोई अभ्यर्थी केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष सफल हो चुका है, तो उसे प्रदान की गई राहत से केवल रिक्त पद उपलब्ध न होने की दलील देकर वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायालय की टिप्पणी का सार था:

"जब अभ्यर्थी मूल आवेदन में सफल हो चुका है, तो उसे दी गई राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।"

हाई कोर्ट ने DSSSB की याचिका में कोई आधार नहीं पाते हुए उसे खारिज कर दिया और संबंधित अधिकारियों को 3 अप्रैल 2025 से छह सप्ताह के भीतर CAT के निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद DSSSB और अन्य अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

इस संबंध में SLP (Civil) Diary No. 44986/2025 दायर की गई।

मामले की सुनवाई 22 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के समक्ष हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ किया, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।

इसके परिणामस्वरूप समय रावत के पक्ष में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों को बरकरार रखने वाला हाई कोर्ट का फैसला अप्रभावित रहा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का आदेश संक्षिप्त है और उसमें EWS प्रमाणपत्र से संबंधित कानूनी सिद्धांतों पर अलग से विस्तृत चर्चा नहीं की गई है।

सरकारी भर्ती और EWS अभ्यर्थियों के लिए निर्णय का महत्व

यह मामला उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी उम्मीदवारी कोविड-19 महामारी के दौरान EWS प्रमाणपत्र प्राप्त करने में देरी के कारण विवादित हुई थी।

इस न्यायिक कार्यवाही से तीन महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं:

1.      EWS प्रमाणपत्र संबंधी विवाद: विशेष परिस्थितियों में वैध EWS प्रमाणपत्र रखने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार का निर्देश दिया जा सकता है, भले ही प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि को लेकर विवाद हो।

2.      न्यायिक निर्णयों की अंतिमता: जब समान कानूनी विवाद पर हाई कोर्ट पहले ही निर्णय दे चुका हो, तो भर्ती अधिकारी मात्र पीठ बदलने के आधार पर उसी विवाद को बार-बार नहीं उठा सकते।

3.      न्यायिक आदेशों का पालन: केवल यह तर्क कि अब रिक्त पद उपलब्ध नहीं हैं, किसी सफल अभ्यर्थी के पक्ष में जारी बाध्यकारी न्यायिक निर्देशों का पालन न करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

यह निर्णय विशेष रूप से DSSSB, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय और EWS आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों से संबंधित भर्ती विवादों में प्रासंगिक है।

हालांकि, इस मामले में दी गई राहत को संबंधित परिस्थितियों और न्यायालयों द्वारा जारी विशिष्ट निर्देशों के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद समय रावत की उम्मीदवारी पर मेरिट, भर्ती नियमों और अन्य पात्रता शर्तों के अनुसार पुनर्विचार करने के निर्देश प्रभावी बने हुए हैं।


मामले का विवरण

सुप्रीम कोर्ट

मामला: दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) एवं अन्य बनाम समय रावत

याचिका: SLP (Civil) Diary No. 44986/2025

आदेश की तिथि: 22 सितंबर 2025

पीठ: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा

निर्णय: विशेष अनुमति याचिका खारिज।

दिल्ली हाई कोर्ट

याचिका: W.P.(C) No. 15356/2024

निर्णय की तिथि: 3 अप्रैल 2025

पीठ: न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति रेणु भटनागर

निर्णय: DSSSB की रिट याचिका खारिज; छह सप्ताह के भीतर CAT के आदेश का पालन करने का निर्देश।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली

मूल आवेदन: O.A. No. 1534/2022

आदेश की तिथि: 22 मई 2024

पीठ: न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग एवं प्रशासनिक सदस्य आनंद एस. खाती

निर्णय: पूर्व में EWS प्रमाणपत्र से संबंधित मामलों में दिए गए निर्देशों का लाभ प्रदान करते हुए मूल आवेदन का निस्तारण।


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