Sunday, November 1, 2026

लंबे समय से कार्यरत MCD संविदा शिक्षकों को CAT से आयु में छूट, नियुक्ति का रास्ता साफ


 लंबे समय से कार्यरत MCD संविदा शिक्षकों को CAT से आयु में छूट, नियुक्ति का रास्ता साफ

ट्रिब्यूनल ने कहा—समान या संबद्ध शिक्षण संवर्गों में लगातार सेवा देने वाले कर्मचारियों के बीच कृत्रिम भेद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली, 24 अगस्त: दिल्ली नगर निगम (MCD) में लंबे समय से संविदा आधार पर कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने चार अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने और योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर नियुक्ति के लिए उनके नामों पर विचार करने का निर्देश दिया है।

न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की पीठ ने पिंकी मौर्य एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड एवं अन्य, O.A. No. 198/2024 में यह आदेश पारित किया। मामले में आदेश 12 अगस्त को सुरक्षित रखा गया था और निर्णय 20 अगस्त 2026 को सुनाया गया।

यह मामला उन संविदा शिक्षकों से संबंधित था, जो कई वर्षों से MCD में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) द्वारा विज्ञापन संख्या 08/2023, पोस्ट कोड 817/23 के तहत निकाली गई नियमित भर्ती में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। शिक्षकों का कहना था कि केवल इसलिए उन्हें नियमित नियुक्ति के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता कि संविदा सेवा करते-करते उनकी आयु निर्धारित सीमा से अधिक हो गई।

ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि भर्ती विज्ञापन में उसी विभाग के संविदा कर्मचारियों के लिए अधिकतम पांच वर्ष तक की आयु छूट का प्रावधान था। इसके अलावा, ग्रुप ‘B’ के ऐसे पदों में भी आयु में छूट दी जा सकती थी, जो समान या संबद्ध संवर्ग के हों और जहां पहले की सेवा उस पद के कर्तव्यों के निर्वहन में उपयोगी हो।

इन प्रावधानों की संकीर्ण व्याख्या को अस्वीकार करते हुए CAT ने कहा कि संबंधित शिक्षण पद ग्रुप ‘B’ में आते हैं और समान या संबद्ध संवर्ग से जुड़े हैं। पीठ ने माना कि प्राथमिक या नर्सरी कक्षाओं को पढ़ाने का पूर्व अनुभव उस पद के कर्तव्यों के निर्वहन में उपयोगी है, जिसके लिए अभ्यर्थी प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।

ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के Union Public Service Commission v. Dr. Jamuna Kurup & Ors. फैसले पर भी भरोसा किया, जिसमें संविदा पर कार्यरत MCD कर्मचारियों को आयु में छूट के उद्देश्य से “MCD के कर्मचारी” माना गया था। CAT ने कहा कि यदि विज्ञापन में किसी लाभ को केवल स्थायी या नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं किया गया है, तो संविदा कर्मचारियों को स्वतः उस लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।

एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में पीठ ने कहा कि “निरंतर सेवा” और “समान विभाग” से जुड़े प्रावधानों की सामंजस्यपूर्ण व्याख्या की जानी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने माना कि जहां कर्मचारियों ने लगातार सेवा दी हो और दोनों पद समान या संबद्ध शिक्षण संवर्गों में हों, वहां केवल विभाग अलग होने के आधार पर कृत्रिम भेद नहीं किया जा सकता।

मामले के दौरान अंतरिम आदेश के तहत अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अस्थायी रूप से भाग लेने की अनुमति दी गई थी। बाद में उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

परिणामों की जांच के बाद CAT ने पाया कि पिंकी मौर्य, अंजू बाला, सरोज बाला और सविता कुमारी मान ने निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने इन चारों के पक्ष में आवेदन स्वीकार करते हुए अधिकारियों को आयु सीमा में छूट देने तथा योग्यता और अन्य भर्ती शर्तों की पूर्ति के अधीन सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) पद पर उनकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया।

ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि इन चारों की नियुक्ति नई नियुक्ति मानी जाएगी। प्रशासनिक सुविधा के अनुसार उनकी नियुक्ति भविष्य में उपलब्ध होने वाली रिक्तियों के विरुद्ध की जा सकती है या उनके लिए अतिरिक्त (सुपरन्यूमेरेरी) पद सृजित किए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।

आवेदकों की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल, निखिल पवार और शुभम बहल उपस्थित हुए। मामले में DSSSB, MCD, दिल्ली सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल को प्रतिवादी बनाया गया था।

 

No comments:

Post a Comment