दिल्ली हाई कोर्ट ने TGT (हिंदी) भर्ती में EWS उम्मीदवार की याचिका स्वीकार की; प्रदीप कुमार के पक्ष में रिज़र्व पैनल विवाद का फैसला
डिवीजन बेंच ने W.P.(C) 6591/2026 स्वीकार की;
याचिकाकर्ता ने खाली EWS पदों के बावजूद
विचार न किए जाने और अधिकारियों की देरी को चुनौती दी थी
नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026: सरकारी भर्ती
में waiting list और reserve panel के संचालन से जुड़े एक महत्वपूर्ण
सेवा-विधि मामले में दिल्ली हाई
कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त 2026 को
प्रदीप कुमार द्वारा दायर रिट याचिका स्वीकार कर ली। प्रदीप कुमार EWS
वर्ग
के उम्मीदवार हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में Trained Graduate Teacher (Hindi) (Male), Post Code 34/21
के
पद पर नियुक्ति के लिए अपने मामले पर विचार किए जाने की मांग की थी।
मामला Pardeep Kumar v.
Government of NCT of Delhi & Ors., W.P.(C) 6591/2026 शीर्षक से दर्ज
था। प्रतिवादियों में GNCTD, Directorate of Education और DSSSB
शामिल
थे।
याचिकाकर्ता की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता
अनुज अग्रवाल ने की। न्यायालय में दाखिल रिट याचिका
में भी Anuj Aggarwal & Company को याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता के
रूप में दर्ज किया गया है।
हालांकि, 25 अगस्त 2026 को
पारित विस्तृत अंतिम आदेश अभी तक दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ
है। इसलिए डिवीजन बेंच की सटीक कानूनी reasoning और operative
directions का पता signed order उपलब्ध होने के बाद ही चलेगा। नीचे
दिया गया विवरण याचिका, list of dates और written submissions पर
आधारित है।
556 TGT (Hindi) पदों की भर्ती
विवाद की शुरुआत Advertisement No.
02/2021 dated 12 May 2021 से हुई, जिसके तहत DSSSB ने TGT
(Hindi) (Male), Post Code 34/21 के 556 पदों के लिए
आवेदन आमंत्रित किए थे।
इनमें से प्रारंभ में 26 पद EWS
वर्ग के लिए आरक्षित
थे। प्रदीप कुमार EWS वर्ग से संबंधित थे और उनके पास संबंधित Income and Asset
Certificate भी था।
लिखित परीक्षा 18 सितंबर
2021 को आयोजित हुई। याचिकाकर्ता ने लगभग 101.5
अंक प्राप्त किए,
जबकि
e-dossier upload करने के लिए shortlisting cut-off 81.82 अंक था। इसलिए उन्हें shortlist किया गया और उन्होंने अपना e-dossier
भी upload
किया।
Main Result, Waiting List और Reserve
Panel
DSSSB ने अंतिम परिणाम 2 अगस्त
2022 को घोषित किया। EWS वर्ग में 25 उम्मीदवारों को provisionally
select किया गया और अन्य उम्मीदवारों को waiting तथा reserve
panel में रखा गया। प्रदीप कुमार reserve panel में थे।
इसके बाद विवाद उन पदों को लेकर उत्पन्न हुआ जो selected
candidates के ineligible पाए जाने या उनकी candidature
cancel होने के कारण खाली रह गए।
विशेष रूप से, 19 अक्टूबर 2022 को CAT
ने O.A.
No. 2473/2022 में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि nominated candidates की eligibility
और documents
की verification
चार
महीने में की जाए, आवश्यकता होने पर waiting-list candidates की scrutiny
अगले
दो महीने में की जाए, और यदि इसके बाद भी vacancies बचें तो reserve-list
candidates पर विचार किया जाए। यह पूरी exercise main result की declaration
से
एक वर्ष के भीतर पूरी होनी थी।
यह पूर्व judicial direction प्रदीप कुमार की बाद की चुनौती का
प्रमुख आधार बनी।
Waiting Panel समाप्त होने के समय भी 11 EWS पद
खाली होने का दावा
याचिकाकर्ता के अनुसार, 1 अगस्त 2023
को
जब waiting panel को expired माना गया, उस समय भी कम से कम 11 EWS vacancies खाली थीं।
याचिकाकर्ता का कहना था कि ये vacancies इसलिए खाली रहीं
क्योंकि respondents ने CAT द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर recruitment process पूरी
नहीं की।
Written submissions में यह जोर देकर कहा गया कि कोई executive
order या policy decision किसी binding judicial
direction को override नहीं कर सकता। यह भी तर्क दिया गया कि authorities
अपनी
ही देरी का लाभ उठाकर waiting panel की expiry का आधार नहीं ले
सकतीं।
पांच और EWS उम्मीदवारों की candidature काफी
देरी से रद्द हुई
एक और महत्वपूर्ण घटना 28 फरवरी
2024 को हुई, जब पांच EWS candidates की candidature
cancel कर दी गई।
याचिकाकर्ता के अनुसार, ये cancellations main result घोषित
होने के लगभग एक वर्ष छह महीने बाद हुईं। उनका तर्क था कि यह delay पूरी तरह authorities
के
कारण हुआ और reserve panel के उम्मीदवार को प्रशासन की देरी का
नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
इन cancellations के बाद उपलब्ध EWS vacancies की
संख्या और बढ़ गई।
DOE ने DSSSB से 16
Reserve-Panel Dossiers मांगे
मामले में 16 अप्रैल 2024
को Directorate of Education द्वारा DSSSB
को लिखे गए पत्र पर विशेष रूप से
भरोसा किया गया।
Record के अनुसार, Directorate of Education ने DSSSB
से EWS reserve panel के 16 candidates के dossiers
भेजने
का अनुरोध किया था, ताकि TGT (Hindi) (Male), Post Code 34/21 के पदों पर
नियुक्ति की जा सके।
लेकिन इसके बाद DSSSB ने Supplementary
Result Notice No. 21 dated 28 May 2024 जारी करके केवल 11
reserve-panel candidates को provisionally select किया।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि DSSSB केवल selecting
body है, employer नहीं। इसलिए जब user department
ने
स्वयं dossiers मांगे थे, तब DSSSB शेष dossiers रोक नहीं सकता था।
इस संबंध में Delhi Subordinate
Services Selection Board v. Lokesh Kumar तथा बाद के Division
Bench निर्णय DSSSB & Ors. v. Sahil
Lochab & Ors. पर भरोसा किया गया।
याचिकाकर्ता से आगे केवल तीन उम्मीदवार
Record में यह भी सामने आया कि DSSSB ने स्वयं CAT
के
समक्ष कहा था कि last selected candidate और प्रदीप कुमार के बीच केवल तीन candidates थे। इस आधार पर याचिकाकर्ता का कहना था
कि उपलब्ध vacancies को देखते हुए वह स्पष्ट रूप से zone of consideration में
आते थे।
यह तथ्य इसलिए और महत्वपूर्ण था क्योंकि 1
जनवरी 2026 के Status Report में
Directorate of Education ने 10
unfilled EWS vacancies होने की बात कही थी।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जब 10 vacancies खाली थीं और
उनसे ऊपर केवल तीन candidates थे, तो उनके मामले
पर विचार न करने का कोई औचित्य नहीं था।
10% EWS Quota लागू करने का अलग CAT आदेश
मामले में EWS reservation की सीमा से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण
पहलू भी था।
प्रदीप कुमार ने O.A. No. 4186/2024 में 10% EWS reservation लागू करने की मांग की थी।
18 फरवरी 2026 को CAT ने
यह OA allow करते हुए respondents को TGT (Hindi) (Male), Post
Code 34/21 में 10% EWS quota लागू
करने और याचिकाकर्ता की candidature पर विचार करने का निर्देश दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 10% quota लागू
होने पर EWS vacancies की संख्या 26 से बढ़कर 56
posts हो जाती है, जिससे उनका दावा और मजबूत होता है।
CAT ने Fresh OA खारिज
की, फिर हाई कोर्ट पहुँचे प्रदीप कुमार
प्रदीप कुमार ने O.A. No. 3857/2024
भी
दायर की थी, जिसमें उन्होंने EWS वर्ग की सभी unfilled TGT
(Hindi) vacancies भरने की मांग की।
CAT ने शुरुआत में एक पद vacant रखने का interim protection दिया
था, लेकिन बाद में 27 मार्च
2026 को O.A. No. 3857/2024 खारिज कर दी।
इसी dismissal को चुनौती देते हुए W.P.(C) 6591/2026 दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई।
मुख्य तर्क: प्रशासनिक देरी का नुकसान उम्मीदवार को नहीं हो सकता
हाई कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की मुख्य दलील थी कि respondents
की
अपनी देरी के कारण उनकी नियुक्ति का अवसर समाप्त नहीं किया जा सकता।
Written submissions में कहा गया कि DSSSB ने documents
की scrutiny
स्वयं
न करने का निर्णय लिया और यह कार्य Directorate of Education पर
छोड़ दिया। दूसरी ओर, Directorate ने ineligible candidates की scrutiny
और cancellation
में
काफी समय लिया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा यह हुआ कि vacancies
खाली
रहीं और बाद में authorities ने स्वयं waiting panel के expiry
होने
का तर्क देना शुरू कर दिया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि ऐसा होने दिया गया तो योग्य और meritorious reserve-panel candidates नियुक्ति
से वंचित हो जाएंगे और भविष्य की भर्ती तक over-age भी हो सकते हैं।
Judicial Direction को Waiting List की Expiry
से निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता
एक अन्य प्रमुख तर्क यह था कि waiting या reserve
panel की expiry का आधार लेकर पहले से मौजूद judicial direction को defeat
नहीं
किया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने CAT के 19 अक्टूबर 2022
के order
पर
भरोसा किया, जिसमें reserve-list candidates तक जाने का
स्पष्ट निर्देश था।
साथ ही Azhar Ali Khan & Ors.
v. Municipal Corporation of Delhi, (1984) 3 SCC 549 पर भी भरोसा
किया गया, इस proposition के लिए कि waiting panel की expiry
किसी
judicial order के compliance में बाधा नहीं बन सकती।
इसके अतिरिक्त Dinesh Kumar
Kashyap & Ors. v. South East Central Railway & Ors. और State of Himachal Pradesh & Anr. v. Aishwarya Thakur
& Ors. पर भी भरोसा किया गया।
डिवीजन बेंच ने रिट याचिका स्वीकार की
मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त 2026 को W.P.(C)
6591/2026 allow कर दी।
यह परिणाम ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है जहां waiting
या reserve
panel इसलिए expire हो जाए क्योंकि recruiting
authority ने selected candidates की scrutiny या ineligible
candidates के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी की हो।
मामला एक व्यापक प्रशासनिक कानून का प्रश्न भी उठाता है—क्या
सरकार पहले recruitment process को delay
कर सकती है और फिर उसी delay के कारण panel
expire होने का आधार लेकर eligible reserve-panel candidate के claim
को reject कर सकती है?
हालांकि, चूंकि विस्तृत final order अभी
दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट पर upload नहीं हुआ है,
इसलिए Division Bench की exact ratio और precise
relief को अभी conclusively नहीं बताया जाना चाहिए।
यह signed order आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Court
ने immediate
appointment, consideration for appointment, reserve panel के operation,
consequential benefits या किसी अन्य specific relief के संबंध में
क्या निर्देश दिए हैं।
फैसले का महत्व
यह निर्णय उन सरकारी भर्तियों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है जहां document
scrutiny, eligibility determination या candidature cancellation में
देरी के कारण waiting panel की validity समाप्त हो जाती
है।
याचिकाकर्ता का मूल प्रश्न यही था:
“क्या सरकार पहले recruitment process में देरी कर
सकती है और फिर उसी देरी के कारण panel expire होने का आधार
लेकर एक eligible candidate को consideration से
वंचित कर सकती है?”
यह तथ्य कि Directorate ने स्वयं reserve-panel
dossiers मांगे थे, vacancies admittedly खाली थीं और
याचिकाकर्ता से आगे सीमित संख्या में ही candidates थे, उनकी
चुनौती के महत्वपूर्ण आधार रहे।
याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता अनुज
अग्रवाल ने की।
नोट: यह रिपोर्ट pleadings,
list of dates और written submissions पर आधारित है तथा उपलब्ध जानकारी के
अनुसार W.P.(C) 6591/2026 को 25 अगस्त 2026
को Division
Bench ने allow किया। चूंकि विस्तृत final judgment/order अभी upload
नहीं
हुआ है, इसलिए Court की specific findings और operative
directions के बारे में signed order उपलब्ध होने तक कोई निश्चित निष्कर्ष
नहीं निकाला जाना चाहिए।

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