Sunday, November 1, 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने TGT (हिंदी) भर्ती में EWS उम्मीदवार की याचिका स्वीकार की; प्रदीप कुमार के पक्ष में रिज़र्व पैनल विवाद का फैसला




दिल्ली हाई कोर्ट ने TGT (हिंदी) भर्ती में EWS उम्मीदवार की याचिका स्वीकार की; प्रदीप कुमार के पक्ष में रिज़र्व पैनल विवाद का फैसला

डिवीजन बेंच ने W.P.(C) 6591/2026 स्वीकार की; याचिकाकर्ता ने खाली EWS पदों के बावजूद विचार न किए जाने और अधिकारियों की देरी को चुनौती दी थी

नई दिल्ली, 30 अगस्त 2026: सरकारी भर्ती में waiting list और reserve panel के संचालन से जुड़े एक महत्वपूर्ण सेवा-विधि मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त 2026 को प्रदीप कुमार द्वारा दायर रिट याचिका स्वीकार कर ली। प्रदीप कुमार EWS वर्ग के उम्मीदवार हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में Trained Graduate Teacher (Hindi) (Male), Post Code 34/21 के पद पर नियुक्ति के लिए अपने मामले पर विचार किए जाने की मांग की थी।

मामला Pardeep Kumar v. Government of NCT of Delhi & Ors., W.P.(C) 6591/2026 शीर्षक से दर्ज था। प्रतिवादियों में GNCTD, Directorate of Education और DSSSB शामिल थे।

याचिकाकर्ता की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने की। न्यायालय में दाखिल रिट याचिका में भी Anuj Aggarwal & Company को याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता के रूप में दर्ज किया गया है।

हालांकि, 25 अगस्त 2026 को पारित विस्तृत अंतिम आदेश अभी तक दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ है। इसलिए डिवीजन बेंच की सटीक कानूनी reasoning और operative directions का पता signed order उपलब्ध होने के बाद ही चलेगा। नीचे दिया गया विवरण याचिका, list of dates और written submissions पर आधारित है।

556 TGT (Hindi) पदों की भर्ती

विवाद की शुरुआत Advertisement No. 02/2021 dated 12 May 2021 से हुई, जिसके तहत DSSSB ने TGT (Hindi) (Male), Post Code 34/21 के 556 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।

इनमें से प्रारंभ में 26 पद EWS वर्ग के लिए आरक्षित थे। प्रदीप कुमार EWS वर्ग से संबंधित थे और उनके पास संबंधित Income and Asset Certificate भी था।

लिखित परीक्षा 18 सितंबर 2021 को आयोजित हुई। याचिकाकर्ता ने लगभग 101.5 अंक प्राप्त किए, जबकि e-dossier upload करने के लिए shortlisting cut-off 81.82 अंक था। इसलिए उन्हें shortlist किया गया और उन्होंने अपना e-dossier भी upload किया।

Main Result, Waiting List और Reserve Panel

DSSSB ने अंतिम परिणाम 2 अगस्त 2022 को घोषित किया। EWS वर्ग में 25 उम्मीदवारों को provisionally select किया गया और अन्य उम्मीदवारों को waiting तथा reserve panel में रखा गया। प्रदीप कुमार reserve panel में थे।

इसके बाद विवाद उन पदों को लेकर उत्पन्न हुआ जो selected candidates के ineligible पाए जाने या उनकी candidature cancel होने के कारण खाली रह गए।

विशेष रूप से, 19 अक्टूबर 2022 को CAT ने O.A. No. 2473/2022 में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि nominated candidates की eligibility और documents की verification चार महीने में की जाए, आवश्यकता होने पर waiting-list candidates की scrutiny अगले दो महीने में की जाए, और यदि इसके बाद भी vacancies बचें तो reserve-list candidates पर विचार किया जाए। यह पूरी exercise main result की declaration से एक वर्ष के भीतर पूरी होनी थी।

यह पूर्व judicial direction प्रदीप कुमार की बाद की चुनौती का प्रमुख आधार बनी।

Waiting Panel समाप्त होने के समय भी 11 EWS पद खाली होने का दावा

याचिकाकर्ता के अनुसार, 1 अगस्त 2023 को जब waiting panel को expired माना गया, उस समय भी कम से कम 11 EWS vacancies खाली थीं।

याचिकाकर्ता का कहना था कि ये vacancies इसलिए खाली रहीं क्योंकि respondents ने CAT द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर recruitment process पूरी नहीं की।

Written submissions में यह जोर देकर कहा गया कि कोई executive order या policy decision किसी binding judicial direction को override नहीं कर सकता। यह भी तर्क दिया गया कि authorities अपनी ही देरी का लाभ उठाकर waiting panel की expiry का आधार नहीं ले सकतीं।

पांच और EWS उम्मीदवारों की candidature काफी देरी से रद्द हुई

एक और महत्वपूर्ण घटना 28 फरवरी 2024 को हुई, जब पांच EWS candidates की candidature cancel कर दी गई।

याचिकाकर्ता के अनुसार, ये cancellations main result घोषित होने के लगभग एक वर्ष छह महीने बाद हुईं। उनका तर्क था कि यह delay पूरी तरह authorities के कारण हुआ और reserve panel के उम्मीदवार को प्रशासन की देरी का नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

इन cancellations के बाद उपलब्ध EWS vacancies की संख्या और बढ़ गई।

DOE ने DSSSB से 16 Reserve-Panel Dossiers मांगे

मामले में 16 अप्रैल 2024 को Directorate of Education द्वारा DSSSB को लिखे गए पत्र पर विशेष रूप से भरोसा किया गया।

Record के अनुसार, Directorate of Education ने DSSSB से EWS reserve panel के 16 candidates के dossiers भेजने का अनुरोध किया था, ताकि TGT (Hindi) (Male), Post Code 34/21 के पदों पर नियुक्ति की जा सके।

लेकिन इसके बाद DSSSB ने Supplementary Result Notice No. 21 dated 28 May 2024 जारी करके केवल 11 reserve-panel candidates को provisionally select किया।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि DSSSB केवल selecting body है, employer नहीं। इसलिए जब user department ने स्वयं dossiers मांगे थे, तब DSSSB शेष dossiers रोक नहीं सकता था।

इस संबंध में Delhi Subordinate Services Selection Board v. Lokesh Kumar तथा बाद के Division Bench निर्णय DSSSB & Ors. v. Sahil Lochab & Ors. पर भरोसा किया गया।

याचिकाकर्ता से आगे केवल तीन उम्मीदवार

Record में यह भी सामने आया कि DSSSB ने स्वयं CAT के समक्ष कहा था कि last selected candidate और प्रदीप कुमार के बीच केवल तीन candidates थे। इस आधार पर याचिकाकर्ता का कहना था कि उपलब्ध vacancies को देखते हुए वह स्पष्ट रूप से zone of consideration में आते थे।

यह तथ्य इसलिए और महत्वपूर्ण था क्योंकि 1 जनवरी 2026 के Status Report में Directorate of Education ने 10 unfilled EWS vacancies होने की बात कही थी।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि जब 10 vacancies खाली थीं और उनसे ऊपर केवल तीन candidates थे, तो उनके मामले पर विचार न करने का कोई औचित्य नहीं था।

10% EWS Quota लागू करने का अलग CAT आदेश

मामले में EWS reservation की सीमा से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी था।

प्रदीप कुमार ने O.A. No. 4186/2024 में 10% EWS reservation लागू करने की मांग की थी।

18 फरवरी 2026 को CAT ने यह OA allow करते हुए respondents को TGT (Hindi) (Male), Post Code 34/21 में 10% EWS quota लागू करने और याचिकाकर्ता की candidature पर विचार करने का निर्देश दिया।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 10% quota लागू होने पर EWS vacancies की संख्या 26 से बढ़कर 56 posts हो जाती है, जिससे उनका दावा और मजबूत होता है।

CAT ने Fresh OA खारिज की, फिर हाई कोर्ट पहुँचे प्रदीप कुमार

प्रदीप कुमार ने O.A. No. 3857/2024 भी दायर की थी, जिसमें उन्होंने EWS वर्ग की सभी unfilled TGT (Hindi) vacancies भरने की मांग की।

CAT ने शुरुआत में एक पद vacant रखने का interim protection दिया था, लेकिन बाद में 27 मार्च 2026 को O.A. No. 3857/2024 खारिज कर दी।

इसी dismissal को चुनौती देते हुए W.P.(C) 6591/2026 दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई।

मुख्य तर्क: प्रशासनिक देरी का नुकसान उम्मीदवार को नहीं हो सकता

हाई कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की मुख्य दलील थी कि respondents की अपनी देरी के कारण उनकी नियुक्ति का अवसर समाप्त नहीं किया जा सकता।

Written submissions में कहा गया कि DSSSB ने documents की scrutiny स्वयं न करने का निर्णय लिया और यह कार्य Directorate of Education पर छोड़ दिया। दूसरी ओर, Directorate ने ineligible candidates की scrutiny और cancellation में काफी समय लिया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा यह हुआ कि vacancies खाली रहीं और बाद में authorities ने स्वयं waiting panel के expiry होने का तर्क देना शुरू कर दिया।

याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि ऐसा होने दिया गया तो योग्य और meritorious reserve-panel candidates नियुक्ति से वंचित हो जाएंगे और भविष्य की भर्ती तक over-age भी हो सकते हैं।

Judicial Direction को Waiting List की Expiry से निष्प्रभावी नहीं किया जा सकता

एक अन्य प्रमुख तर्क यह था कि waiting या reserve panel की expiry का आधार लेकर पहले से मौजूद judicial direction को defeat नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने CAT के 19 अक्टूबर 2022 के order पर भरोसा किया, जिसमें reserve-list candidates तक जाने का स्पष्ट निर्देश था।

साथ ही Azhar Ali Khan & Ors. v. Municipal Corporation of Delhi, (1984) 3 SCC 549 पर भी भरोसा किया गया, इस proposition के लिए कि waiting panel की expiry किसी judicial order के compliance में बाधा नहीं बन सकती।

इसके अतिरिक्त Dinesh Kumar Kashyap & Ors. v. South East Central Railway & Ors. और State of Himachal Pradesh & Anr. v. Aishwarya Thakur & Ors. पर भी भरोसा किया गया।

डिवीजन बेंच ने रिट याचिका स्वीकार की

मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त 2026 को W.P.(C) 6591/2026 allow कर दी।

यह परिणाम ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है जहां waiting या reserve panel इसलिए expire हो जाए क्योंकि recruiting authority ने selected candidates की scrutiny या ineligible candidates के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी की हो।

मामला एक व्यापक प्रशासनिक कानून का प्रश्न भी उठाता है—क्या सरकार पहले recruitment process को delay कर सकती है और फिर उसी delay के कारण panel expire होने का आधार लेकर eligible reserve-panel candidate के claim को reject कर सकती है?

हालांकि, चूंकि विस्तृत final order अभी दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट पर upload नहीं हुआ है, इसलिए Division Bench की exact ratio और precise relief को अभी conclusively नहीं बताया जाना चाहिए।

यह signed order आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि Court ने immediate appointment, consideration for appointment, reserve panel के operation, consequential benefits या किसी अन्य specific relief के संबंध में क्या निर्देश दिए हैं।

फैसले का महत्व

यह निर्णय उन सरकारी भर्तियों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है जहां document scrutiny, eligibility determination या candidature cancellation में देरी के कारण waiting panel की validity समाप्त हो जाती है।

याचिकाकर्ता का मूल प्रश्न यही था:

“क्या सरकार पहले recruitment process में देरी कर सकती है और फिर उसी देरी के कारण panel expire होने का आधार लेकर एक eligible candidate को consideration से वंचित कर सकती है?”

यह तथ्य कि Directorate ने स्वयं reserve-panel dossiers मांगे थे, vacancies admittedly खाली थीं और याचिकाकर्ता से आगे सीमित संख्या में ही candidates थे, उनकी चुनौती के महत्वपूर्ण आधार रहे।

याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने की।

नोट: यह रिपोर्ट pleadings, list of dates और written submissions पर आधारित है तथा उपलब्ध जानकारी के अनुसार W.P.(C) 6591/2026 को 25 अगस्त 2026 को Division Bench ने allow किया। चूंकि विस्तृत final judgment/order अभी upload नहीं हुआ है, इसलिए Court की specific findings और operative directions के बारे में signed order उपलब्ध होने तक कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।

 

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