दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला अभ्यर्थी के ओबीसी आरक्षण के अधिकार को बरकरार रखा, दिल्ली सरकार की रिट याचिका खारिज
अदालत ने
कहा
कि
परिवार
के
किसी
सदस्य
के
पहले
से
जारी
ओबीसी
प्रमाणपत्र
के
आधार
पर
दिल्ली
के
सक्षम
अधिकारियों
द्वारा
जारी
किया
गया
ओबीसी
प्रमाणपत्र
भर्ती
की
निर्धारित
शर्तों
को
पूरा
करता
है।
अभ्यर्थी
का
परीक्षा
परिणाम
आठ
सप्ताह
के
भीतर
घोषित
करने
और
नियमानुसार
आगे
की
कार्रवाई
करने
का
निर्देश।
नई दिल्ली
| 1 नवंबर 2026
सरकारी नौकरियों
में
अन्य
पिछड़ा
वर्ग
(ओबीसी) के
आरक्षण
अधिकारों
से
जुड़े
एक
महत्वपूर्ण
फैसले
में
दिल्ली
हाई
कोर्ट
ने
दिल्ली
सरकार
(जीएनसीटीडी) की
उस
रिट
याचिका
को
खारिज
कर
दिया
है,
जिसमें
महिला
अभ्यर्थी
सुश्री
अंजू
को
ओबीसी
श्रेणी
के
अंतर्गत
विचार
किए
जाने
की
पात्रता
को
चुनौती
दी
गई
थी।
न्यायमूर्ति सी.
हरि
शंकर
और
न्यायमूर्ति
विनोद
कुमार
की
खंडपीठ
ने
2 सितंबर 2026 को
सुनाए
गए
अपने
फैसले
में
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
(कैट) के
उस
आदेश
को
बरकरार
रखा,
जिसमें
अंजू
को
ओबीसी
श्रेणी
के
अंतर्गत
पात्र
माना
गया
था।
यह फैसला
दिल्ली
सरकार
एवं
अन्य
बनाम
अंजू,
रिट
याचिका
संख्या
W.P.(C) 6026/2025, तथा सरकारी
भर्तियों
में
ओबीसी
प्रमाणपत्रों
की
वैधता
से
संबंधित
अन्य
मामलों
में
सुनाया
गया।
दिल्ली हाई
कोर्ट
में
सुश्री
अंजू
की
ओर
से
अधिवक्ता
अनुज
अग्रवाल
ने
पैरवी
की।
मामले की
पृष्ठभूमि
यह विवाद
उस
समय
उत्पन्न
हुआ,
जब
दिल्ली
सरकार
के
राजस्व
विभाग
द्वारा
जारी
ओबीसी
प्रमाणपत्र
होने
के
बावजूद
सरकारी
भर्ती
प्रक्रिया
में
अंजू
को
ओबीसी
आरक्षण
का
लाभ
दिए
जाने
की
पात्रता
पर
प्रश्न
उठाया
गया।
अंजू के
ओबीसी
प्रमाणपत्र
में
उन्हें
जाट
समुदाय
का
सदस्य
बताया
गया
था।
यह
प्रमाणपत्र
उनके
भाई
द्याश
चौधरी
को
दिल्ली
के
सक्षम
प्राधिकारी
द्वारा
14 जुलाई 2017 को
जारी
किए
गए
ओबीसी
प्रमाणपत्र
के
आधार
पर
बनाया
गया
था।
संबंधित भर्ती
विज्ञापन
में
ओबीसी
श्रेणी
के
अंतर्गत
आरक्षण
का
लाभ
प्राप्त
करने
के
लिए
कुछ
विशेष
शर्तें
निर्धारित
की
गई
थीं।
विशेष रूप
से,
विज्ञापन
की
शर्त
5(iv)(A) के अनुसार,
दिल्ली
सरकार
के
राजस्व
विभाग
द्वारा
परिवार
के
किसी
सदस्य
को
पहले
जारी
किए
गए
दिल्ली
के
ओबीसी
प्रमाणपत्र
के
आधार
पर
बनाया
गया
प्रमाणपत्र
आरक्षण
के
उद्देश्य
से
मान्य
था।
केंद्रीय प्रशासनिक
अधिकरण
(कैट) ने
अंजू
को
ओबीसी
श्रेणी
के
अंतर्गत
विचार
किए
जाने
के
योग्य
माना
था।
हालांकि, दिल्ली
सरकार
ने
अधिकरण
के
इस
निर्णय
को
चुनौती
देते
हुए
दिल्ली
हाई
कोर्ट
में
W.P.(C) 6026/2025 दाखिल की।
हाई कोर्ट
ने केंद्रीय
प्रशासनिक अधिकरण
के फैसले
को सही
ठहराया
संबंधित भर्ती
विज्ञापन
की
शर्तों
तथा
अंजू
द्वारा
प्रस्तुत
ओबीसी
प्रमाणपत्र
की
जांच
करने
के
बाद
दिल्ली
हाई
कोर्ट
की
खंडपीठ
ने
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
के
निष्कर्षों
से
सहमति
व्यक्त
की।
हाई कोर्ट
ने
पाया
कि
अंजू
का
मामला
एक
अन्य
महिला
अभ्यर्थी
सुमन
के
मामले
के
समान
था,
जिसकी
पात्रता
पर
भी
एक
संबंधित
रिट
याचिका
में
विचार
किया
गया
था।
अदालत ने
अपने
फैसले
के
पैराग्राफ
25 में स्पष्ट
रूप
से
कहा:
"सुमन के
मामले
की
तरह,
इस
मामले
में
भी
प्रतिवादी
को
जारी
किया
गया
प्रमाणपत्र
भर्ती
विज्ञापन
की
शर्त
5(iv)(A) के अनुरूप
था।"
खंडपीठ ने
आगे
कहा:
"इसलिए
हम
अधिकरण
के
इस
निष्कर्ष
से
सहमत
हैं
कि
प्रतिवादी
ओबीसी
अभ्यर्थी
के
रूप
में
विचार
किए
जाने
की
पात्र
थी।"
इस प्रकार
हाई
कोर्ट
ने
पाया
कि
अंजू
को
ओबीसी
श्रेणी
के
अंतर्गत
पात्र
मानने
के
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
के
फैसले
में
कोई
त्रुटि
नहीं
थी।
परिणामस्वरूप, दिल्ली
सरकार
की
रिट
याचिका
खारिज
कर
दी
गई।
आठ सप्ताह
के भीतर
परीक्षा परिणाम
घोषित करने
का निर्देश
महिला अभ्यर्थी
को
महत्वपूर्ण
राहत
प्रदान
करते
हुए
दिल्ली
हाई
कोर्ट
ने
संबंधित
भर्ती
अधिकारियों
को
निर्देश
दिया
कि
अंजू
का
परीक्षा
परिणाम
घोषित
किया
जाए
तथा
फैसले
की
तारीख
से
आठ
सप्ताह
के
भीतर
नियमानुसार
आवश्यक
कार्रवाई
की
जाए।
अदालत ने
अपने
फैसले
के
पैराग्राफ
28 में कहा:
"प्रतिवादी
का
परिणाम
घोषित
किया
जाए
और
आज
से
आठ
सप्ताह
की
अवधि
के
भीतर
उसके
अनुसार
आगे
की
कार्रवाई
की
जाए।"
इस निर्देश
का
उद्देश्य
यह
सुनिश्चित
करना
है
कि
अभ्यर्थी
की
उम्मीदवारी
अनिश्चितकाल
तक
लंबित
न
रहे
और
भर्ती
अधिकारियों
द्वारा
न्यायालय
के
आदेश
का
पालन
किया
जाए।
हालांकि, यह
स्पष्ट
करना
आवश्यक
है
कि
हाई
कोर्ट
ने
सीधे
नियुक्ति
देने
का
आदेश
नहीं
दिया
है।
नियुक्ति
से
संबंधित
आगे
की
कार्रवाई
लागू
भर्ती
नियमों
तथा
अन्य
आवश्यक
पात्रता
शर्तों
के
अधीन
होगी।
फैसले का
कानूनी महत्व
दिल्ली हाई
कोर्ट
का
यह
फैसला
उन
अभ्यर्थियों
के
लिए
महत्वपूर्ण
है,
जिनकी
ओबीसी
आरक्षण
संबंधी
पात्रता
उनके
जाति
प्रमाणपत्र
जारी
किए
जाने
के
आधार
या
प्रक्रिया
को
लेकर
विवादित
हो
जाती
है।
यह निर्णय
इस
कानूनी
सिद्धांत
को
मजबूत
करता
है
कि
भर्ती
अधिकारियों
को
किसी
अभ्यर्थी
के
प्रमाणपत्र
की
वैधता
का
परीक्षण
भर्ती
विज्ञापन
में
निर्धारित
वास्तविक
शर्तों
के
अनुसार
ही
करना
चाहिए।
यदि भर्ती
विज्ञापन
में
स्पष्ट
रूप
से
यह
प्रावधान
है
कि
परिवार
के
किसी
सदस्य
को
दिल्ली
सरकार
द्वारा
पहले
जारी
किए
गए
ओबीसी
प्रमाणपत्र
के
आधार
पर
नया
प्रमाणपत्र
जारी
किया
जा
सकता
है,
तो
ऐसी
निर्धारित
शर्त
को
पूरा
करने
वाले
प्रमाणपत्र
की
उपेक्षा
करके
अभ्यर्थी
को
आरक्षण
के
लाभ
से
वंचित
नहीं
किया
जा
सकता।
हालांकि, इस
फैसले
का
अर्थ
यह
नहीं
है
कि
दिल्ली
में
जारी
प्रत्येक
ओबीसी
प्रमाणपत्र
धारक
स्वतः
दिल्ली
में
आरक्षण
का
लाभ
पाने
का
अधिकारी
होगा।
अदालत का
निर्णय
संबंधित
भर्ती
विज्ञापन
की
विशिष्ट
शर्तों
और
अंजू
द्वारा
प्रस्तुत
प्रमाणपत्र
के
तथ्यों
पर
आधारित
है।
सरकारी नौकरियों
के
लिए
आवेदन
करने
वाले
उन
अभ्यर्थियों
के
लिए,
जो
इसी
प्रकार
के
विवादों
का
सामना
कर
रहे
हैं,
यह
फैसला
भर्ती
अधिसूचनाओं
में
निर्धारित
दस्तावेजी
शर्तों
के
महत्व
को
रेखांकित
करता
है।
साथ ही,
यह
निर्णय
दर्शाता
है
कि
सरकारी
भर्ती
प्रक्रियाओं
में
निर्धारित
नियमों
और
पात्रता
शर्तों
का
पालन
सुनिश्चित
करने
में
न्यायिक
समीक्षा
की
महत्वपूर्ण
भूमिका
है।
अधिवक्ता अनुज
अग्रवाल ने
की सफल
पैरवी
इस मामले
में
सुश्री
अंजू
की
ओर
से
अधिवक्ता
अनुज
अग्रवाल
ने
दिल्ली
हाई
कोर्ट
में
पैरवी
की।
अधिवक्ता
अनुज
अग्रवाल
मुख्य
रूप
से
सेवा
एवं
रोजगार
संबंधी
कानूनों
के
क्षेत्र
में
वकालत
करते
हैं।
यह निर्णय
उन
संबंधित
मामलों
के
समूह
का
हिस्सा
है,
जिनमें
सरकारी
भर्तियों
में
ओबीसी
प्रमाणपत्रों
की
वैधता
और
आरक्षण
के
अधिकारों
से
जुड़े
महत्वपूर्ण
कानूनी
प्रश्न
उठाए
गए
थे।
इन मामलों
में
दिल्ली
सरकार
एवं
अन्य
बनाम
सुमन,
W.P.(C) 10124/2025 तथा डीएसएसएसबी
एवं
अन्य
बनाम
लाल
चंद,
W.P.(C) 6450/2025 भी शामिल
थे।
अंजू के
मामले
में
दिया
गया
यह
फैसला
इस
बात
का
महत्वपूर्ण
उदाहरण
है
कि
जब
किसी
अभ्यर्थी
की
पात्रता
भर्ती
विज्ञापन
में
निर्धारित
शर्तों
के
अनुरूप
होती
है,
तो
न्यायालय
उसके
अधिकारों
की
रक्षा
के
लिए
हस्तक्षेप
कर
सकता
है।
मूल निर्णय
की प्रति
दिल्ली हाई
कोर्ट
के
2 सितंबर 2026 के
फैसले
की
पूरी
प्रति
नीचे
दिए
गए
लिंक
पर
उपलब्ध
है:
दिल्ली
हाई
कोर्ट
का
पूरा
फैसला
पढ़ें
(PDF)
मामले का
संक्षिप्त विवरण
|
विवरण |
जानकारी |
|
मामले
का नाम |
दिल्ली
सरकार एवं
अन्य बनाम
अंजू |
|
रिट
याचिका संख्या |
W.P.(C) 6026/2025 |
|
न्यायालय |
दिल्ली
हाई कोर्ट |
|
न्यायपीठ |
न्यायमूर्ति
सी. हरि
शंकर एवं
न्यायमूर्ति विनोद
कुमार |
|
फैसले
की तारीख |
2 सितंबर
2026 |
|
विवाद
का विषय |
सरकारी
भर्ती में
ओबीसी आरक्षण
की पात्रता |
|
न्यायालय
का फैसला |
दिल्ली
सरकार की
रिट याचिका
खारिज |
|
प्रमुख
निर्देश |
आठ सप्ताह
में परिणाम
घोषित कर
नियमानुसार आगे
की कार्रवाई |
|
अंजू
की ओर
से अधिवक्ता |
अनुज
अग्रवाल |
अनुज अग्रवाल
एंड कंपनी
अधिवक्तागण (ADVOCATES)
कार्यालय का
पता:
के-17,
द्वितीय
तल,
जंगपुरा
एक्सटेंशन,
नई
दिल्ली
– 110014
दिल्ली हाई
कोर्ट
चैंबर्स:
483, ब्लॉक-II,
लॉयर्स
चैंबर्स,
दिल्ली
हाई
कोर्ट,
नई
दिल्ली
– 110003
मोबाइल:
+91 9891403206
ईमेल:
anujaggarwal1984@gmail.com
anujaggarwalcompany@gmail.com
वेबसाइट:

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