विशेष शिक्षक को बड़ी राहत: कैट ने ओएमआर शीट में गोले भरने की गलती के आधार पर डीएसएसएसबी द्वारा उम्मीदवारी रद्द करने का निर्णय निरस्त किया
न्यायाधिकरण ने कहा कि जब उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन हो चुका हो, अंक घोषित किए जा चुके हों और अभ्यर्थी को अगले चरण के लिए चयनित कर लिया गया हो, तो केवल ओएमआर शीट में तकनीकी गलती के आधार पर उसकी उम्मीदवारी को यांत्रिक ढंग से रद्द नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
शिक्षक पद
की
एक
अभ्यर्थी को
महत्वपूर्ण राहत
देते
हुए
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने
सुश्री
दीक्षा
माथुर
की
विशेष शिक्षक (प्राथमिक), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), पद कोड 15/17 के लिए उम्मीदवारी रद्द
किए
जाने
के
निर्णय
को
निरस्त
कर
दिया
है।
यह निर्णय
9 अक्टूबर 2026 को सुश्री दीक्षा माथुर बनाम डीएसएसएसबी एवं अन्य, मूल
आवेदन
(OA) संख्या
1043/2019 में
सुनाया
गया।
यह निर्णय
माननीय श्री मनीष गर्ग, न्यायिक सदस्य तथा माननीय डॉ. आनंद एस. खाती, प्रशासनिक सदस्य की
खंडपीठ
ने
सुनाया।
मामले की पृष्ठभूमि
सुश्री दीक्षा
माथुर
ने
22 जुलाई
2018 को
आयोजित
डीएसएसएसबी की
लिखित
परीक्षा में
भाग
लिया
और
81.75 अंक प्राप्त किए। उन्हें अगले
चरण
के
लिए
चयनित
किया
गया
तथा
अपने
शैक्षणिक एवं
अन्य
आवश्यक
दस्तावेज ई-डोजियर के माध्यम
से
अपलोड
करने
की
अनुमति
दी
गई।
हालांकि, डीएसएसएसबी ने
बाद
में
6 मार्च
2019 को
उनकी
उम्मीदवारी इस
आधार
पर
रद्द
कर
दी
कि
उन्होंने अपनी
ओएमआर
उत्तर
पुस्तिका में
रोल
नंबर
से
संबंधित गोले
सही
ढंग
से
नहीं
भरे
थे।
न्यायाधिकरण
के प्रमुख निष्कर्ष
न्यायाधिकरण ने
कहा
कि
अभ्यर्थियों को
सामान्यतः परीक्षा संबंधी
निर्देशों का
कड़ाई
से
पालन
करना
चाहिए।
हालांकि, वर्तमान मामले
में
अभ्यर्थी की
उत्तर
पुस्तिका का
मूल्यांकन पहले
ही
किया
जा
चुका
था,
उसके
अंक
दर्ज
हो
चुके
थे
और
उसे
दस्तावेज अपलोड
करने
के
अगले
चरण
में
भी
जाने
दिया
गया
था।
दिल्ली उच्च
न्यायालय के
निर्णय
कुसुम गुप्ता बनाम डीएसएसएसबी एवं अन्य पर
भरोसा
करते
हुए
न्यायाधिकरण ने
माना
कि
इन
परिस्थितियों में
केवल
ओएमआर
शीट
में
रोल
नंबर
के
गोले
गलत
भरने
के
आधार
पर
उम्मीदवारी रद्द
करना
उचित
नहीं
था।
न्यायाधिकरण
द्वारा जारी निर्देश
न्यायाधिकरण ने
मूल आवेदन स्वीकार करते हुए 6 मार्च 2019 की उम्मीदवारी रद्द करने वाली सूचना को सुश्री दीक्षा माथुर के संबंध में निरस्त कर दिया।
डीएसएसएसबी को
निर्देश दिया
गया
कि
वह
अभ्यर्थी के
पहले
से
दर्ज
अंकों
और
लागू
भर्ती
नियमों
के
आधार
पर
उनकी
उम्मीदवारी पर
पुनर्विचार करे।
यदि अभ्यर्थी सभी
आवश्यक
योग्यताएं पूरी
करती
हैं
और
उनके
प्राप्त अंक
निर्धारित चयन
मानदंडों के
अनुसार
नियुक्ति के
लिए
पर्याप्त हैं,
तो
उन्हें
कानून
के
अनुसार
नियुक्ति तथा
उससे
जुड़े
परिणामी लाभ
प्रदान
किए
जाएं।
न्यायाधिकरण ने यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया।
न्यायाधिकरण ने
यह
भी
स्पष्ट
किया
कि
अभ्यर्थी उस
अवधि
के
वास्तविक वेतन
और
भत्तों
की
हकदार
नहीं
होंगी,
जिस
अवधि
में
वह
सेवा
में
नहीं
थीं।
निर्णय
का महत्व
यह निर्णय
सरकारी
भर्तियों से
संबंधित एक
महत्वपूर्ण कानूनी
सिद्धांत को
मजबूत
करता
है:
यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने किसी अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन कर दिया है, उसके अंक घोषित कर दिए हैं और उसे चयन प्रक्रिया के अगले चरण में भाग लेने की अनुमति दे दी है, तो केवल ओएमआर शीट में हुई तकनीकी गलती के आधार पर उसकी उम्मीदवारी स्वतः रद्द नहीं की जा सकती।
इस मामले
में
अभ्यर्थी की
ओर
से
अधिवक्ता श्री अनुज अग्रवाल, अनुज अग्रवाल एंड कंपनी ने
पैरवी
की।
पूरा निर्णय पढ़ें:
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का निर्णय दिनांक 09.10.2026
अनुज अग्रवाल
एंड कंपनी
अधिवक्तागण (ANUJ AGGARWAL & COMPANY — ADVOCATES)
कार्यालय के पते:
के-17, द्वितीय तल,
जंगपुरा एक्सटेंशन, नई
दिल्ली
– 110014
483,
ब्लॉक-II,
लॉयर्स
चैंबर्स, दिल्ली
उच्च
न्यायालय, नई
दिल्ली
– 110003
मोबाइल: 9891403206
ईमेल:
वेबसाइट: https://advocateanujaggarwal.com/home.php
मामले का विवरण: सुश्री दीक्षा
माथुर
बनाम
डीएसएसएसबी एवं
अन्य,
मूल
आवेदन
संख्या
1043/2019, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, प्रधान
पीठ,
नई
दिल्ली,
निर्णय
दिनांक
09.10.2026।
