EWS प्रमाणपत्र मामले में
सुप्रीम कोर्ट ने
DSSSB की विशेष अनुमति
याचिका खारिज की;
शिक्षक अभ्यर्थी के
पक्ष में दिल्ली
हाई कोर्ट का
फैसला बरकरार
सुप्रीम
कोर्ट
ने
समय
रावत
के
पक्ष
में
दिए
गए
दिल्ली
हाई
कोर्ट
के
फैसले
में
हस्तक्षेप
करने
से
इनकार
किया;
कोविड-19
महामारी
के
दौरान
EWS प्रमाणपत्र
प्राप्त
करने
में
देरी
के
कारण
अभ्यर्थी
को
नियुक्ति
के
लिए
विचार
किए
जाने
के
अधिकार
से
वंचित
नहीं
किया
जा
सकता।
दिल्ली
हाई
कोर्ट
ने
रिक्त
पद
उपलब्ध
नहीं
होने
संबंधी
DSSSB की
दलील
खारिज
करते
हुए
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
(CAT) के
आदेश
का
छह
सप्ताह
के
भीतर
पालन
करने
का
निर्देश
दिया
था।
नई
दिल्ली
| 6 नवंबर
2026
सरकारी नौकरियों में आर्थिक
रूप
से
कमजोर
वर्ग
(EWS) के
आरक्षण
से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले
में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ
सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) और
अन्य अधिकारियों द्वारा दायर विशेष अनुमति
याचिका (SLP) खारिज कर दी है।
यह मामला एक शिक्षक अभ्यर्थी
की उम्मीदवारी से संबंधित था,
जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान निर्धारित
समय-सीमा के भीतर
EWS प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं कर पाने
के कारण अस्वीकार कर
दिया गया था।
न्यायमूर्ति
विक्रम
नाथ
और
न्यायमूर्ति
प्रशांत
कुमार
मिश्रा
की पीठ ने 22 सितंबर
2025 को
पारित आदेश में दिल्ली
हाई कोर्ट के 3 अप्रैल 2025 के
फैसले में हस्तक्षेप करने
से इनकार कर दिया।
यह आदेश दिल्ली
अधीनस्थ
सेवा
चयन
बोर्ड
(DSSSB) एवं
अन्य
बनाम
समय
रावत, SLP
(Civil) Diary No. 44986/2025 में
पारित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति
याचिका दाखिल करने में हुई
देरी को माफ करते
हुए कहा कि वह
हाई कोर्ट के निर्णय में
हस्तक्षेप करने का इच्छुक
नहीं है। तदनुसार, विशेष
अनुमति याचिका खारिज कर दी गई।
इस आदेश के परिणामस्वरूप
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली
द्वारा अभ्यर्थी के पक्ष में
दिए गए निर्देशों को
बरकरार रखने वाला दिल्ली
हाई कोर्ट का निर्णय यथावत
बना हुआ है।
निर्धारित तिथि तक
EWS प्रमाणपत्र नहीं मिलने
पर उम्मीदवारी खारिज
मामला DSSSB द्वारा 12 मई 2021 को जारी विज्ञापन
संख्या 02/21 से संबंधित है,
जिसके अंतर्गत दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय
में विभिन्न शिक्षण पदों के लिए
आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
समय
रावत
ने
प्रशिक्षित
स्नातक
शिक्षक
(TGT), प्राकृतिक
विज्ञान
(महिला),
पद
कोड
36/21, के
लिए
EWS श्रेणी
के
अंतर्गत
आवेदन
किया
था।
आवेदन की अंतिम तिथि
पहले 24 जून 2021 निर्धारित की गई थी,
जिसे बाद में बढ़ाकर
4 जुलाई 2021 कर दिया गया।
अभ्यर्थी के अनुसार, कोविड-19
महामारी के दौरान सरकार
द्वारा लगाए गए लॉकडाउन
और प्रतिबंधों के कारण निर्धारित
समय के भीतर EWS प्रमाणपत्र
प्राप्त करना संभव नहीं
हो सका।
DSSSB ने इस आधार पर
अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज
कर दी कि उनका
EWS प्रमाणपत्र आवेदन की अंतिम तिथि
या उससे पहले जारी
नहीं हुआ था।
इस निर्णय से व्यथित होकर
अभ्यर्थी ने केंद्रीय प्रशासनिक
अधिकरण के समक्ष मूल
आवेदन
संख्या
1534/2022 दायर
किया और अपनी उम्मीदवारी
पर पुनर्विचार तथा EWS श्रेणी के अंतर्गत नियुक्ति
के लिए विचार किए
जाने की मांग की।
CAT ने अभ्यर्थी को दी राहत
22 मई
2024 को
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की पीठ, जिसमें
न्यायिक
सदस्य
मनीष
गर्ग
और
प्रशासनिक
सदस्य
आनंद
एस.
खाती
शामिल थे, ने समय
रावत के मूल आवेदन
का निस्तारण करते हुए समान
परिस्थितियों वाले अन्य EWS अभ्यर्थियों
के मामलों में दिए गए
निर्देशों का लाभ प्रदान
किया।
अधिकरण ने अंजू
एवं
अन्य
बनाम
राष्ट्रीय
राजधानी
क्षेत्र
दिल्ली
सरकार
एवं
अन्य, O.A.
No. 1524/2022 तथा संबंधित मामलों में 8 अगस्त 2023 को दिए गए
निर्णय पर भरोसा किया।
उस निर्णय में अधिकरण ने
संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया
था कि जिन अभ्यर्थियों
के पास उनकी आय,
संपत्ति और आर्थिक स्थिति
के आधार पर जारी
वैध EWS प्रमाणपत्र हैं, उनकी उम्मीदवारी
पर पुनर्विचार किया जाए।
अधिकरण ने स्पष्ट किया
था कि यदि पुनः
जांच में अभ्यर्थियों की
उम्मीदवारी नियमानुसार सही पाई जाती
है, तो उनकी मेरिट,
संबंधित पद और भर्ती
नियमों के अनुसार नियुक्ति
की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
अधिकरण
ने
यह
भी
निर्देश
दिया
था
कि
अभ्यर्थियों
को
परिणामी
लाभ
काल्पनिक
आधार
(Notional Basis) पर
दिए
जाएंगे,
जबकि
वास्तविक
आर्थिक
लाभ
उनकी
नियुक्ति
के
बाद
कार्यभार
ग्रहण
करने
की
तिथि
से
प्राप्त
होंगे।
इन्हीं निर्देशों का लाभ समय
रावत को भी प्रदान
किया गया।
दिल्ली हाई कोर्ट
ने DSSSB की याचिका
खारिज की
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को
चुनौती देते हुए DSSSB ने
दिल्ली हाई कोर्ट के
समक्ष W.P.(C) No.
15356/2024 दायर की।
न्यायमूर्ति
नवीन
चावला
और
न्यायमूर्ति
रेणु
भटनागर
की खंडपीठ ने 3
अप्रैल
2025 को
DSSSB की रिट याचिका खारिज
कर दी।
DSSSB का तर्क था कि
अभ्यर्थी निर्धारित अंतिम तिथि तक EWS प्रमाणपत्र
प्रस्तुत नहीं कर सकी
थी और इसलिए उसे
नियुक्ति का लाभ नहीं
दिया जा सकता।
इसके अतिरिक्त DSSSB ने यह भी
दलील दी कि वर्तमान
में कोई रिक्त पद
उपलब्ध नहीं है, जिस
पर अभ्यर्थी को नियुक्त किया
जा सके।
हाई कोर्ट ने इन दलीलों
को स्वीकार नहीं किया।
न्यायालय ने कहा कि
समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों से
संबंधित विवाद पर हाई कोर्ट
पहले ही निर्णय दे
चुका है।
इस संदर्भ में न्यायालय ने
राष्ट्रीय
राजधानी
क्षेत्र
दिल्ली
सरकार
एवं
अन्य
बनाम
ऋषिकेश
शर्मा तथा संबंधित मामलों
में 22 मई 2024 और 19 जुलाई 2024 को पारित आदेशों
का उल्लेख किया।
पीठ बदलने से
पहले तय हो चुके कानूनी
विवाद दोबारा नहीं
खोले जा सकते
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया
कि जब किसी कानूनी
विवाद पर न्यायालय पहले
ही निर्णय दे चुका हो,
तो केवल न्यायिक पीठ
की संरचना बदल जाने के
कारण उसी विवाद को
दोबारा नहीं खोला जाना
चाहिए।
न्यायालय ने इस तथ्य
को भी महत्वपूर्ण माना
कि पहले दिए गए
आदेशों का DSSSB द्वारा आंशिक रूप से पालन
किया जा चुका था।
इस प्रकार, न्यायालय ने उन प्रश्नों
पर पुनः विचार करने
से इनकार कर दिया जो
पहले ही समान मामलों
में तय किए जा
चुके थे।
रिक्त पद नहीं
होने की दलील से न्यायिक
राहत समाप्त नहीं
की जा सकती
इस निर्णय का एक महत्वपूर्ण
पहलू DSSSB की यह दलील
थी कि अभ्यर्थी को
समायोजित करने के लिए
वर्तमान में कोई रिक्त
पद उपलब्ध नहीं है।
हाई कोर्ट ने इस तर्क
को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने अपने 19 जुलाई
2024 के पूर्व आदेश का उल्लेख
करते हुए कहा कि
बड़ी संख्या में पद रिक्त
पड़े होने की बात
पहले ही दर्ज की
जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त न्यायालय ने स्पष्ट किया
कि जब
कोई
अभ्यर्थी
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
के
समक्ष
सफल
हो
चुका
है,
तो
उसे
प्रदान
की
गई
राहत
से
केवल
रिक्त
पद
उपलब्ध
न
होने
की
दलील
देकर
वंचित
नहीं
किया
जा
सकता।
न्यायालय की टिप्पणी का
सार था:
"जब
अभ्यर्थी
मूल
आवेदन
में
सफल
हो
चुका
है,
तो
उसे
दी
गई
राहत
से
वंचित
नहीं
किया
जा
सकता।"
हाई कोर्ट ने DSSSB की याचिका में
कोई आधार नहीं पाते
हुए उसे खारिज कर
दिया और संबंधित अधिकारियों
को 3
अप्रैल
2025 से
छह
सप्ताह
के
भीतर
CAT के
निर्देशों
का
पालन
करने
का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने
हाई कोर्ट के
फैसले में हस्तक्षेप
से किया इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट से
राहत नहीं मिलने के
बाद DSSSB और अन्य अधिकारियों
ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इस संबंध में SLP (Civil) Diary No.
44986/2025 दायर की गई।
मामले की सुनवाई 22 सितंबर
2025 को
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति
प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के
समक्ष हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल
करने में हुई देरी
को माफ किया, लेकिन
दिल्ली हाई कोर्ट के
फैसले में हस्तक्षेप करने
से इनकार करते हुए विशेष
अनुमति याचिका खारिज कर दी।
इसके परिणामस्वरूप समय रावत के
पक्ष में केंद्रीय प्रशासनिक
अधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों
को बरकरार रखने वाला हाई
कोर्ट का फैसला अप्रभावित
रहा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का आदेश संक्षिप्त
है और उसमें EWS प्रमाणपत्र
से संबंधित कानूनी सिद्धांतों पर अलग से
विस्तृत चर्चा नहीं की गई
है।
सरकारी भर्ती और
EWS अभ्यर्थियों के लिए
निर्णय का महत्व
यह मामला उन अभ्यर्थियों के
लिए महत्वपूर्ण है जिनकी उम्मीदवारी
कोविड-19 महामारी के दौरान EWS प्रमाणपत्र
प्राप्त करने में देरी
के कारण विवादित हुई
थी।
इस न्यायिक कार्यवाही से तीन महत्वपूर्ण
पहलू सामने आते हैं:
1. EWS
प्रमाणपत्र
संबंधी
विवाद:
विशेष परिस्थितियों में वैध EWS प्रमाणपत्र
रखने वाले अभ्यर्थियों की
उम्मीदवारी पर पुनर्विचार का
निर्देश दिया जा सकता
है, भले ही प्रमाणपत्र
जारी होने की तिथि
को लेकर विवाद हो।
2. न्यायिक
निर्णयों
की
अंतिमता:
जब समान कानूनी विवाद
पर हाई कोर्ट पहले
ही निर्णय दे चुका हो,
तो भर्ती अधिकारी मात्र पीठ बदलने के
आधार पर उसी विवाद
को बार-बार नहीं
उठा सकते।
3. न्यायिक
आदेशों
का
पालन:
केवल यह तर्क कि
अब रिक्त पद उपलब्ध नहीं
हैं, किसी सफल अभ्यर्थी
के पक्ष में जारी
बाध्यकारी न्यायिक निर्देशों का पालन न
करने का पर्याप्त आधार
नहीं हो सकता।
यह निर्णय विशेष रूप से DSSSB, दिल्ली
सरकार
के
शिक्षा
निदेशालय
और
EWS आरक्षण
का
लाभ
प्राप्त
करने
वाले
अभ्यर्थियों
से संबंधित भर्ती विवादों में प्रासंगिक है।
हालांकि, इस मामले में
दी गई राहत को
संबंधित परिस्थितियों और न्यायालयों द्वारा
जारी विशिष्ट निर्देशों के संदर्भ में
ही समझा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार किए
जाने के बाद समय
रावत की उम्मीदवारी पर
मेरिट, भर्ती नियमों और अन्य पात्रता
शर्तों के अनुसार पुनर्विचार
करने के निर्देश प्रभावी
बने हुए हैं।
मामले का विवरण
सुप्रीम
कोर्ट
मामला:
दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड
(DSSSB) एवं अन्य बनाम समय
रावत
याचिका:
SLP (Civil) Diary No. 44986/2025
आदेश
की
तिथि:
22 सितंबर 2025
पीठ:
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति
प्रशांत कुमार मिश्रा
निर्णय:
विशेष अनुमति याचिका खारिज।
दिल्ली
हाई
कोर्ट
याचिका:
W.P.(C) No. 15356/2024
निर्णय
की
तिथि:
3 अप्रैल 2025
पीठ:
न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं
न्यायमूर्ति रेणु भटनागर
निर्णय:
DSSSB की रिट याचिका खारिज;
छह सप्ताह के भीतर CAT के
आदेश का पालन करने
का निर्देश।
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण
(CAT), प्रधान
पीठ,
नई
दिल्ली
मूल
आवेदन:
O.A. No. 1534/2022
आदेश
की
तिथि:
22 मई 2024
पीठ:
न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग एवं
प्रशासनिक सदस्य आनंद एस. खाती
निर्णय:
पूर्व में EWS प्रमाणपत्र से संबंधित मामलों
में दिए गए निर्देशों
का लाभ प्रदान करते
हुए मूल आवेदन का
निस्तारण।
अनुज अग्रवाल एंड कंपनी
अधिवक्तागण
(ADVOCATES)
कार्यालय
का
पता
– 1
K-17, द्वितीय तल,
जंगपुरा एक्सटेंशन,
नई दिल्ली – 110014
कार्यालय
का
पता
– 2
483, ब्लॉक-II, लॉयर्स चैंबर्स,
दिल्ली हाई कोर्ट,
नई दिल्ली – 110003
मोबाइल:
9891403206
ईमेल:
वेबसाइट:
https://advocateanujaggarwal.com/home.php
