Friday, November 6, 2026

डीएसएसएसबी द्वारा वेटिंग पैनल समाप्त करने के फैसले पर कैट ने उठाए सवाल, दिल्ली सरकार की वर्ष 2020 की नीति से हटने का कारण बताने का निर्देश

 


डीएसएसएसबी द्वारा वेटिंग पैनल समाप्त करने के फैसले पर कैट ने उठाए सवाल, दिल्ली सरकार की वर्ष 2020 की नीति से हटने का कारण बताने का निर्देश

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने डीएसएसएसबी से पूछा कि दिल्ली सरकार की एक वर्ष तक प्रतीक्षा सूची बनाए रखने की नीति में बदलाव क्यों किया गया।

सहायक अध्यापक (नर्सरी) भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में अधिकरण ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर नीति परिवर्तन का औचित्य स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

नई दिल्ली | 6 नवंबर 2026

सरकारी नौकरियों में भर्ती, प्रतीक्षा सूची (Waiting List) और चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति संबंधी अवसरों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) द्वारा रिजर्व पैनल अथवा वेटिंग पैनल समाप्त करने के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अधिकरण ने पाया कि सुनवाई के दौरान डीएसएसएसबी के अधिवक्ता यह स्पष्ट नहीं कर सके कि दिल्ली सरकार की वर्ष 2020 की भर्ती नीति, जिसके अंतर्गत एक वर्ष तक प्रतीक्षा सूची बनाए रखने का प्रावधान था, में परिवर्तन करने का क्या औचित्य था।

न्यायिक सदस्य श्री राजवीर सिंह वर्मा तथा प्रशासनिक सदस्य श्री छबीलेंद्र राउल की पीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वर्ष 2020 की नीति से हटकर नई नीति अपनाने की आवश्यकता और उसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करें।

अधिकरण ने इस संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

यह आदेश प्रिया जैन एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड एवं अन्य, मूल आवेदन संख्या O.A. 4198/2026, में पारित किया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने मामले की पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता शुभम बहल, निखिल पवार, तान्या रोज़, प्रदीप कुमार, शाकिब मलिक, कृतिका मट्टा तथा भूमिका कुंद्रा भी उपस्थित रहे।

डीएसएसएसबी द्वारा प्रतीक्षा सूची समाप्त करने के निर्णय को चुनौती

विवाद की शुरुआत डीएसएसएसबी द्वारा 19 फरवरी 2024 को जारी एक नोटिस-सह-शुद्धिपत्र से हुई, जिसके माध्यम से बोर्ड ने निर्णय लिया कि संयुक्त परीक्षा योजना (Combined Examination Scheme) के अंतर्गत भविष्य में कोई रिजर्व पैनल अथवा प्रतीक्षा सूची नहीं बनाई जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि दिल्ली सरकार की पूर्ववर्ती भर्ती नीति के अनुसार एक वर्ष तक प्रतीक्षा सूची बनाए रखने का प्रावधान था।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रतीक्षा सूची का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि चयनित उम्मीदवार नियुक्ति ग्रहण नहीं करते अथवा अन्य कारणों से रिक्त पद शेष रह जाते हैं, तो लागू भर्ती नियमों के अनुसार अन्य पात्र अभ्यर्थियों पर नियुक्ति के लिए विचार किया जा सके।

उनका कहना था कि प्रतीक्षा सूची समाप्त कर देने से ऐसे उम्मीदवारों के लिए नियुक्ति का अवसर समाप्त हो सकता है, जो अन्यथा पूर्ववर्ती नीति के अंतर्गत रिजर्व पैनल में शामिल किए जाने के पात्र हो सकते थे।

सहायक अध्यापक (नर्सरी) भर्ती के अभ्यर्थियों ने खटखटाया अधिकरण का दरवाजा

यह मामला डीएसएसएसबी द्वारा सहायक अध्यापक (नर्सरी) के पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है।

याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया के संबंध में 17 सितंबर 2026 को जारी परिणाम सूचना संख्या 1659 (Result Notice No. 1659) के कुछ पहलुओं को भी चुनौती दी है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि वर्ष 2020 की नीति प्रभावी रहती, तो उनके नाम रिजर्व पैनल अथवा प्रतीक्षा सूची में शामिल किए जाने पर विचार किया जा सकता था।

लेकिन डीएसएसएसबी द्वारा प्रतीक्षा सूची समाप्त किए जाने के कारण वे इस अवसर से वंचित हो सकते हैं।

इस विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न यह भी उठाया गया है कि क्या कोई भर्ती एजेंसी राज्य सरकार की मौजूदा भर्ती नीति से बिना पर्याप्त औचित्य के अलग नीति अपना सकती है।

नीति परिवर्तन का कारण नहीं बता सका डीएसएसएसबी, अधिकरण ने लिया संज्ञान

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अधिकरण का ध्यान दिल्ली सरकार की वर्ष 2020 की नीति की ओर आकर्षित किया।

उन्होंने तर्क दिया कि डीएसएसएसबी द्वारा प्रतीक्षा सूची समाप्त करने का निर्णय सरकार की पूर्ववर्ती नीति के विपरीत है।

अधिकरण ने अपने आदेश में दर्ज किया कि डीएसएसएसबी के अधिवक्ता नीति परिवर्तन के पीछे का औचित्य स्पष्ट करने की स्थिति में नहीं थे।

पीठ ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि दिल्ली सरकार की नीति में एक वर्ष तक प्रतीक्षा सूची बनाए रखने का प्रावधान होने के बावजूद डीएसएसएसबी ने अलग व्यवस्था क्यों अपनाई।

इसके बाद अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह स्पष्ट करें कि वर्ष 2020 की नीति से हटने और वर्तमान भर्ती के लिए संशोधित नीति अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

अधिकरण ने आवश्यक स्पष्टीकरण एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस, जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह

अधिकरण ने डीएसएसएसबी, शिक्षा निदेशालय तथा मामले में पक्षकार बनाए गए अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों को नोटिस जारी किया।

संबंधित प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया।

अधिकरण ने प्रतिवादियों को अपने जवाबी हलफनामे (Counter-Affidavits) दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

इसके अतिरिक्त, अधिकरण ने सभी याचिकाकर्ताओं को एक ही मूल आवेदन के माध्यम से संयुक्त रूप से मामला प्रस्तुत करने की अनुमति भी प्रदान की।

जब याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अंतरिम राहत प्रदान करने का अनुरोध किया, तब अधिकरण ने पहले नीति परिवर्तन का औचित्य स्पष्ट करने का निर्देश दिया तथा अंतरिम राहत पर विचार के लिए मामले को प्रारंभ में 4 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया।

उपलब्ध केस-स्टेटस रिकॉर्ड के अनुसार, मामला अभी लंबित है और अगली सुनवाई की तारीख 3 दिसंबर 2026 दर्ज है।

सरकारी भर्ती में प्रतीक्षा सूची के महत्व से जुड़ा बड़ा सवाल

यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में प्रतीक्षा सूची की भूमिका और भर्ती एजेंसियों द्वारा नीतिगत परिवर्तन किए जाने के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।

प्रतीक्षा सूची का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में पात्र अभ्यर्थियों पर विचार करने की व्यवस्था उपलब्ध कराना हो सकता है, जब चयनित उम्मीदवार नियुक्ति ग्रहण नहीं करते, उनकी उम्मीदवारी निरस्त हो जाती है अथवा अन्य कारणों से पद रिक्त रह जाते हैं।

हालांकि, प्रतीक्षा सूची में नाम होने मात्र से किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होता। नियुक्ति का प्रश्न संबंधित भर्ती नियमों, उपलब्ध रिक्तियों और लागू नीति पर निर्भर करता है।

याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि पूर्ववर्ती नीति समाप्त करने से उन अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जो प्रतीक्षा सूची के माध्यम से नियुक्ति के लिए विचार किए जाने की अपेक्षा रखते थे।

उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में नियमों के परिवर्तन, प्रतीक्षा सूची के संचालन तथा उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध पात्र उम्मीदवारों पर विचार किए जाने से संबंधित न्यायिक निर्णयों का भी सहारा लिया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकरण ने अभी तक डीएसएसएसबी की 19 फरवरी 2024 की अधिसूचना को निरस्त नहीं किया है और न ही प्रतीक्षा सूची बहाल करने अथवा याचिकाकर्ताओं को नियुक्ति देने का अंतिम आदेश पारित किया है।

फिलहाल, अधिकरण ने अधिकारियों से नीति परिवर्तन का कारण स्पष्ट करने को कहा है। मामले के मूल कानूनी प्रश्नों पर अंतिम निर्णय अभी शेष है।

इस मामले का अंतिम परिणाम डीएसएसएसबी की भर्ती प्रक्रियाओं में प्रतीक्षा सूची समाप्त किए जाने से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।


मामले का विवरण

मामला: प्रिया जैन एवं अन्य बनाम डीएसएसएसबी एवं अन्य

मूल आवेदन संख्या: O.A. 4198/2026

न्यायालय: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली

पीठ: माननीय श्री राजवीर सिंह वर्मा, न्यायिक सदस्य एवं माननीय श्री छबीलेंद्र राउल, प्रशासनिक सदस्य

आदेश की तारीख: 26 अक्टूबर 2026

विषय: डीएसएसएसबी की भर्ती प्रक्रिया में रिजर्व पैनल / प्रतीक्षा सूची समाप्त करने के निर्णय को चुनौती

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता: अधिवक्ता अनुज अग्रवाल एवं उनकी टीम

अगली सूचीबद्ध सुनवाई: 3 दिसंबर 2026 (उपलब्ध केस-स्टेटस के अनुसार)


अधिक जानकारी एवं मीडिया संबंधी संपर्क

ANUJ AGGARWAL & COMPANY
ADVOCATES

कार्यालय 1:
K-17, द्वितीय तल,
जंगपुरा एक्सटेंशन,
नई दिल्ली – 110014

कार्यालय 2:
483, ब्लॉक-II, लॉयर्स चैंबर्स,
दिल्ली उच्च न्यायालय,
नई दिल्ली – 110003

मोबाइल: 9891403206

ईमेल:
anujaggarwal1984@gmail.com
anujaggarwalcompany@gmail.com

वेबसाइट:
https://advocateanujaggarwal.com/home.php

 

No comments:

Post a Comment