Friday, August 14, 2026

UPSC प्रिंसिपल भर्ती में दिल्ली के गेस्ट टीचर्स को CAT से राहत; ट्रिब्यूनल ने कहा—शिक्षण अनुभव को मान्यता देने की मांग को ‘इस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता’



 UPSC प्रिंसिपल भर्ती में दिल्ली के गेस्ट टीचर्स को CAT से राहत; ट्रिब्यूनल ने कहाशिक्षण अनुभव को मान्यता देने की मांग कोइस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता

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बे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स को 124 प्रिंसिपल पदों की चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति; ट्रिब्यूनल ने कहा कि उनके निरंतर शिक्षण अनुभव कोविजिटिंग गेस्ट फैकल्टीमानकर बाहर किया जा सकता है या नहीं, इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक; परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे।

 

नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026: दिल्ली सरकार के स्कूलों में लंबे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स के करियर से जुड़े एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने गेस्ट टीचर्स के एक समूह को दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय में प्रिंसिपल के पद पर नियुक्ति के लिए UPSC द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दे दी है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि आवेदकों ने सीमित अंतरिम संरक्षण के लिए प्रथम दृष्टया मामला स्थापित किया है। पीठ ने यह भी कहा कि आवेदकों की यह दलील कि भर्ती नियमों में गेस्ट टीचर्स के रूप में अर्जित अनुभव को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं किया गया है, इस स्तर पर खारिज नहीं की जा सकती।

यह आदेश 12 अगस्त 2026 को Anuja Sharma & Ors. v. Union Public Service Commission (UPSC) & Ors., O.A. No. 3000/2026 में न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की पीठ ने पारित किया।

यह भर्ती UPSC Advertisement No. 51/2026 के तहत की जा रही है, जिसमें शिक्षा निदेशालय में प्रिंसिपल के 124 पद और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पद अधिसूचित किए गए हैं। वर्तमान मामला प्रिंसिपल पद के लिए आवेदकों की पात्रता से संबंधित है।

आवेदकों की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल के साथ अधिवक्ता शुभम बहल, शाकिब मलिक, निखिल पवार, तान्या रोज़ और प्रदीप कुमार उपस्थित हुए।

गेस्ट टीचर्स ने शिक्षण अनुभव को बाहर किए जाने को चुनौती दी

विवाद UPSC की भर्ती संबंधी एक शर्त को लेकर है, जिसके अनुसार किसी उम्मीदवार द्वारा पार्ट-टाइम आधार, दैनिक वेतन या विजिटिंग गेस्ट फैकल्टी के रूप में अर्जित अनुभव को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्टिंग हेतु वैध अनुभव की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर्स ने तर्क दिया कि इस शर्त को लागू करके उनके वर्षों के शिक्षण अनुभव को बाहर नहीं किया जा सकता।

याचिका के अनुसार, आवेदक कई वर्षों से दिल्ली सरकार के स्कूलों में TGT, PGT अथवा लेक्चरर के रूप में कार्यरत हैं और भर्ती प्रक्रिया की अंतिम तिथि तक उनके पास 10 वर्ष से अधिक का शिक्षण अनुभव था। उनका कहना है कि वे स्वीकृत पदों के विरुद्ध लगातार शिक्षण कार्य करते रहे हैं।

ट्रिब्यूनल के आदेश में भी दर्ज है कि आवेदक पांच वर्ष से अधिक समय से गेस्ट टीचर्स के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

भर्ती नियमों में गेस्ट टीचर्स के अनुभव को बाहर करने का प्रावधान नहीं: आवेदक

आवेदकों की मुख्य दलील थी कि UPSC के विज्ञापन में विजिटिंग गेस्ट फैकल्टी के रूप में अर्जित अनुभव को बाहर करने की शर्त अवश्य है, लेकिन प्रिंसिपल पद के लिए लागू भर्ती नियमों में गेस्ट टीचर्स द्वारा अर्जित अनुभव को बाहर करने का कोई प्रावधान नहीं है।

यह तर्क दिया गया कि किसी विज्ञापन में दी गई प्रशासनिक शर्त वैधानिक भर्ती नियमों से आगे नहीं जा सकती और भर्ती नियमों में मौजूद होने वाली कोई अतिरिक्त अयोग्यता नहीं जोड़ सकती।

आवेदकों ने भर्ती नियमों के क्लॉज 5 का भी सहारा लिया, जिसके तहत सरकार आवश्यक या उचित समझे जाने पर, UPSC से परामर्श करके, किसी वर्ग या श्रेणी के व्यक्तियों के संबंध में नियमों के प्रावधानों में छूट दे सकती है।

उनकी ओर से कहा गया कि नियम स्वयं उचित मामलों में लचीलापन प्रदान करते हैं और केवल नियुक्ति के नाम या स्वरूप के आधार पर उनके अनुभव को पूर्ण रूप से बाहर करने का समर्थन नहीं करते।

गेस्ट टीचरको स्वतःविजिटिंग गेस्ट फैकल्टीनहीं माना जा सकता

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिक्षा निदेशालय द्वारा लगातार नियुक्त गेस्ट टीचर और केवल विजिटिंग अथवा गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति के बीच अंतर है।

आवेदकों की ओर से दलील दी गई कि विजिटिंग फैकल्टी सामान्यतः कभी-कभार या प्रति लेक्चर के आधार पर नियुक्त हो सकती है, जबकि दिल्ली सरकार के गेस्ट टीचर्स नियमित रूप से शिक्षण कार्य करते हैं और उन्हें मासिक पारिश्रमिक दिया जाता है।

इसलिए केवल उनकी नियुक्ति का नामगेस्ट टीचरहोने के कारण उनके शिक्षण अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

याचिका में यह भी कहा गया कि आवेदक स्वीकृत शिक्षण पदों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं और उनकी तुलना केवल आकस्मिक, अस्थायी या जरूरत के आधार पर नियुक्त व्यक्तियों से नहीं की जा सकती।

CAT ने कहाआवेदकों की दलील कोइस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता

दोनों पक्षों को सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने मुख्य प्रश्न की पहचान कीक्या लगातार कार्य करने वाले और मासिक पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले गेस्ट टीचर्स का अनुभव UPSC विज्ञापन में उल्लिखितविजिटिंग गेस्ट फैकल्टीके अनुभव के समान माना जा सकता है?

पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की:

प्रथम दृष्टया, आवेदकों की यह दलील कि भर्ती नियमों में गेस्ट टीचर्स द्वारा अर्जित अनुभव को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं किया गया है, इस स्तर पर खारिज नहीं की जा सकती।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि उसने अभी इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। उसने प्रतिवादियों की इस दलील को भी विचार योग्य माना कि विज्ञापन में दी गई शर्तें केवल स्पष्टीकरणात्मक हैं और उन्हें भर्ती नियमों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि विज्ञापन की शर्तों और भर्ती नियमों, विशेष रूप से क्लॉज 5, के बीच संबंध पर प्रतिवादियों का जवाब हलफनामे पर आने के बाद विस्तार से विचार किया जाएगा।

क्या लगातार कार्यरत गेस्ट टीचर्सविजिटिंग गेस्ट फैकल्टीके दायरे में आते हैंइस पर फैसला बाकी

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि उसे यह तय करना होगा कि विजिटिंग गेस्ट फैकल्टी शब्द का दायरा इतना व्यापक है या नहीं कि उसमें शिक्षा निदेशालय द्वारा लगातार नियुक्त और मासिक पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले गेस्ट टीचर्स भी शामिल हो जाएं।

पीठ के अनुसार, इसका उत्तर भर्ती नियमों की योजना, आवेदकों की नियुक्ति की वास्तविक प्रकृति तथा विवादित भर्ती निर्देश के सही अर्थ और दायरे पर निर्भर करेगा।

इस टिप्पणी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे यह बड़ा कानूनी प्रश्न खुला रहता है कि केवलगेस्टशब्द समान होने के आधार पर लंबे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स को कभी-कभार कार्य करने वाली विजिटिंग फैकल्टी के समान माना जा सकता है या नहीं।

UPSC ने अंतरिम राहत का विरोध किया

UPSC ने अंतरिम राहत का विरोध करते हुए मूल आवेदन की विचारणीयता पर भी प्रारंभिक आपत्ति उठाई।

प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि विज्ञापन में दी गई शर्तें केवल स्पष्टीकरणात्मक और स्पष्टकारी हैं तथा उन्हें भर्ती नियमों के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से पढ़ा जाना चाहिए।

उनका यह भी कहना था कि भर्ती विज्ञापन का हिस्सा होने के कारण ये निर्देश उम्मीदवारों पर बाध्यकारी हैं और केवल यह स्पष्ट करते हैं कि शॉर्टलिस्टिंग के लिए आवश्यक अनुभव की गणना किस प्रकार की जाएगी।

ट्रिब्यूनल ने इस तर्क को अभी तो स्वीकार किया और ही खारिज किया। उसने कहा कि प्रतिवादियों के विस्तृत जवाब के बाद इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा।

आवेदन की अंतिम तिथि के कारण अंतरिम संरक्षण

ट्रिब्यूनल के समक्ष एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी था कि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 थी।

आवेदकों का तर्क था कि यदि उन्हें अभी चयन प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया गया और बाद में वे मुकदमे में सफल हो गए, तो इस दौरान खोए अवसर की प्रभावी रूप से भरपाई नहीं की जा सकेगी।

CAT ने इस चिंता में दम पाया और कहा कि यदि अभी भाग लेने से रोक दिया गया तथा आवेदक बाद में सफल होते हैं, तो उन्हें होने वाली क्षति ऐसी हो सकती है जिसकी पर्याप्त भरपाई संभव हो।

इसी आधार पर ट्रिब्यूनल ने माना कि सुविधा का संतुलन आवेदकों को चयन प्रक्रिया में भाग लेने के अधिकार की अंतरिम सुरक्षा देने के पक्ष में है, बशर्ते उनका अधिकार मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।

गेस्ट टीचर्स को प्रिंसिपल चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति

अंतरिम राहत देते हुए CAT ने निर्देश दिया:

आवेदकों को Advertisement No. 51/2026 के तहत प्रिंसिपल पद की चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।

यह निर्देश दोनों पक्षों के अधिकारों और दलीलों को प्रभावित किए बिना दिया गया है।

मूल आवेदन में विशेष रूप से यह राहत मांगी गई थी कि आवेदकों के आवेदन अस्थायी रूप से स्वीकार किए जाएं और उन्हें UPSC द्वारा 1 नवंबर 2026 को निर्धारित परीक्षा सहित पूरी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने दिया जाए।

नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं; परिणाम सीलबंद लिफाफे में रहेंगे

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश के तहत चयन प्रक्रिया में भाग लेने से आवेदकों को नियुक्ति या अंतिम चयन का कोई निहित, न्यायसंगत अथवा अपरिहार्य अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

उनकी उम्मीदवारी और पात्रता मूल आवेदन के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

इसके अतिरिक्त CAT ने निर्देश दिया कि आवेदकों के परिणाम, यदि कोई हों, सीलबंद लिफाफे में रखे जाएं और ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना उन्हें खोला जाए और उन पर कोई कार्रवाई की जाए।

इस प्रकार आदेश ने एक ओर आवेदकों के चयन प्रक्रिया में भाग लेने के अवसर को सुरक्षित रखा है, वहीं दूसरी ओर पात्रता विवाद का अंतिम फैसला होने से पहले किसी प्रकार का अंतिम अधिकार उत्पन्न होने से भी रोका है।

आवेदकों का दावादिल्ली सरकार ने स्वयं गेस्ट टीचर्स के अनुभव को मान्यता दी है

मूल आवेदन में कई तथ्यों का उल्लेख करते हुए यह दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार ने स्वयं गेस्ट टीचर्स के अनुभव को मान्यता दी है।

याचिका के अनुसार, सरकार के 11 जून 2019 के ऑफिस मेमोरेंडम में यह प्रावधान है कि यदि किसी गेस्ट टीचर ने किसी शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 120 दिन कार्य किया है, तो उसे एक वर्ष का शिक्षण अनुभव माना जाएगा।

याचिका में शिक्षा निदेशालय द्वारा 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल उस हलफनामे का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि गेस्ट टीचर्स स्वीकृत शिक्षण पदों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं।

आवेदकों ने यह भी कहा कि शिक्षा निदेशालय ने स्वयं उन्हें उच्च शिक्षण एवं प्रशासनिक पदों की भर्ती में भाग लेने के लिए अनुभव प्रमाणपत्र जारी किए हैं, जो उनके अनुसार गेस्ट टीचर के रूप में अर्जित शिक्षण अनुभव की सरकारी मान्यता को दर्शाता है।

हालांकि, इन दलीलों पर ट्रिब्यूनल का अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

लंबे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स के लिए मामले के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं

यह मामला उन गेस्ट टीचर्स को प्रभावित करने वाला एक बड़ा प्रश्न उठाता है जो वर्षों से सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैंक्या वास्तविक और महत्वपूर्ण शिक्षण अनुभव को केवल इसलिए नजरअंदाज किया जा सकता है क्योंकि शिक्षक की नियुक्ति कोगेस्टकहा गया है?

आवेदकों का कहना है कि स्वीकृत पदों पर नियमित शिक्षण कार्य करते हुए अर्जित निरंतर अनुभव की तुलना विजिटिंग फैकल्टी की अंतराल पर, आकस्मिक अथवा प्रति लेक्चर नियुक्ति से नहीं की जा सकती।

अंतिम निर्णय का प्रभाव वर्तमान आवेदकों से आगे भी जा सकता है, विशेष रूप से उन लंबे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स पर जो ऐसे वरिष्ठ शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति या सीधी भर्ती चाहते हैं, जिनके भर्ती नियम न्यूनतम शिक्षण अनुभव तो निर्धारित करते हैं लेकिन उसे केवल नियमित या स्थायी सेवा तक सीमित नहीं करते।

फिलहाल CAT ने केवल सीमित अंतरिम संरक्षण दिया है। ट्रिब्यूनल ने तो अंतिम रूप से यह घोषित किया है कि गेस्ट टीचर का अनुभव प्रिंसिपल पद के लिए मान्य अनुभव है और ही UPSC की विवादित शर्त को अंतिम रूप से अवैध ठहराया है।

प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद आवेदकों को दो सप्ताह के भीतर रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

दोनों पक्षों को अंतरिम आदेश में बदलाव, संशोधन, स्पष्टीकरण अथवा उसे निरस्त कराने के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।

मामला: Anuja Sharma & Ors. v. Union Public Service Commission (UPSC) & Ors.


मामला संख्या: O.A. No. 3000/2026


न्यायालय: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, प्रधान पीठ, नई दिल्ली


पीठ: मनीष गर्ग, सदस्य (न्यायिक) एवं डॉ. आनंद एस. खाती, सदस्य (प्रशासनिक)


आदेश की तारीख: 12 अगस्त 2026


संबंधित पद: प्रिंसिपल, शिक्षा निदेशालय, GNCTD


विज्ञापन: UPSC Advertisement No. 51/2026


प्रिंसिपल के पद: 124


अगली सुनवाई: 27 अक्टूबर 2026

 

https://advocateanujaggarwal.com/advocateadmin/img/Finalist/2026081417867317282026%20CAT%20-%20ANUJA%20SHARMA.pdf

 

https://advocateanujaggarwal.com/home.php

 

https://judgmentslaw.blogspot.com/2026/08/cat-relief-for-delhi-guest-teachers-in.html

 

 

 

अनुज अग्रवाल


अधिवक्ता
K-17,
द्वितीय तल, जंगपुरा एक्सटेंशन,

नई दिल्ली110014

483, ब्लॉक-2, लॉयर्स चैंबर्स,

दिल्ली हाई कोर्ट, नई दिल्ली110003

मोबाइल9891403206

लैंडलाइन011-35554905

ईमेलanujaggarwal1984@gmail.com

 

 

 

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