UPSC प्रिंसिपल भर्ती में दिल्ली के गेस्ट टीचर्स को CAT से राहत; ट्रिब्यूनल ने कहा—शिक्षण अनुभव को मान्यता देने की मांग को ‘इस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता’
लं
बे समय से कार्यरत गेस्ट टीचर्स को 124 प्रिंसिपल पदों की चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति; ट्रिब्यूनल ने कहा कि उनके निरंतर शिक्षण अनुभव को “विजिटिंग गेस्ट फैकल्टी” मानकर बाहर किया जा सकता है या नहीं, इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक; परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे।
नई
दिल्ली,
14 अगस्त 2026: दिल्ली
सरकार
के
स्कूलों
में
लंबे
समय
से
कार्यरत
गेस्ट
टीचर्स
के
करियर
से
जुड़े
एक
महत्वपूर्ण
अंतरिम
आदेश
में
केंद्रीय प्रशासनिक
अधिकरण
(CAT),
प्रधान पीठ,
नई दिल्ली
ने
गेस्ट
टीचर्स
के
एक
समूह
को
दिल्ली सरकार
के शिक्षा
निदेशालय में
प्रिंसिपल के
पद पर
नियुक्ति
के
लिए
UPSC
द्वारा
आयोजित
चयन
प्रक्रिया
में
भाग
लेने
की
अनुमति
दे
दी
है।
ट्रिब्यूनल
ने
कहा
कि
आवेदकों
ने
सीमित अंतरिम
संरक्षण के
लिए प्रथम
दृष्टया मामला
स्थापित
किया
है।
पीठ
ने
यह
भी
कहा
कि
आवेदकों
की
यह
दलील
कि
भर्ती
नियमों
में
गेस्ट
टीचर्स
के
रूप
में
अर्जित
अनुभव
को
स्पष्ट
रूप
से
बाहर
नहीं
किया
गया
है,
“इस स्तर
पर खारिज
नहीं की
जा सकती।”
यह
आदेश
12
अगस्त 2026 को
Anuja
Sharma & Ors. v. Union Public Service Commission (UPSC) & Ors.,
O.A. No. 3000/2026 में न्यायिक
सदस्य मनीष
गर्ग और
प्रशासनिक सदस्य
डॉ.
आनंद एस.
खाती की
पीठ
ने
पारित
किया।
यह
भर्ती
UPSC
Advertisement No. 51/2026 के
तहत
की
जा
रही
है,
जिसमें
शिक्षा
निदेशालय
में
प्रिंसिपल के
124
पद और
वाइस-प्रिंसिपल
के 704
पद अधिसूचित
किए
गए
हैं।
वर्तमान
मामला
प्रिंसिपल
पद
के
लिए
आवेदकों
की
पात्रता
से
संबंधित
है।
आवेदकों
की
ओर
से
अधिवक्ता अनुज
अग्रवाल के
साथ
अधिवक्ता
शुभम बहल,
शाकिब मलिक,
निखिल पवार,
तान्या रोज़
और प्रदीप
कुमार उपस्थित
हुए।
गेस्ट
टीचर्स ने
शिक्षण अनुभव
को बाहर
किए जाने
को चुनौती
दी
विवाद
UPSC
की
भर्ती
संबंधी
एक
शर्त
को
लेकर
है,
जिसके
अनुसार
किसी
उम्मीदवार
द्वारा
पार्ट-टाइम
आधार, दैनिक
वेतन या
विजिटिंग गेस्ट
फैकल्टी के
रूप में
अर्जित अनुभव
को
इंटरव्यू
के
लिए
शॉर्टलिस्टिंग
हेतु
वैध
अनुभव
की
गणना
में
शामिल
नहीं
किया
जाएगा।
दिल्ली
सरकार
के
शिक्षा
निदेशालय
के
स्कूलों
में
कार्यरत
गेस्ट
टीचर्स
ने
तर्क
दिया
कि
इस
शर्त
को
लागू
करके
उनके
वर्षों
के
शिक्षण
अनुभव
को
बाहर
नहीं
किया
जा
सकता।
याचिका
के
अनुसार,
आवेदक
कई
वर्षों
से
दिल्ली
सरकार
के
स्कूलों
में
TGT,
PGT अथवा लेक्चरर
के
रूप
में
कार्यरत
हैं
और
भर्ती
प्रक्रिया
की
अंतिम
तिथि
तक
उनके
पास
10
वर्ष से
अधिक का
शिक्षण अनुभव
था।
उनका
कहना
है
कि
वे
स्वीकृत
पदों
के
विरुद्ध
लगातार
शिक्षण
कार्य
करते
रहे
हैं।
ट्रिब्यूनल
के
आदेश
में
भी
दर्ज
है
कि
आवेदक
पांच वर्ष
से अधिक
समय से
गेस्ट टीचर्स
के रूप
में सेवाएं
दे रहे
हैं।
भर्ती
नियमों में
गेस्ट टीचर्स
के अनुभव
को बाहर
करने का
प्रावधान नहीं:
आवेदक
आवेदकों
की
मुख्य
दलील
थी
कि
UPSC
के
विज्ञापन
में
विजिटिंग
गेस्ट
फैकल्टी
के
रूप
में
अर्जित
अनुभव
को
बाहर
करने
की
शर्त
अवश्य
है,
लेकिन
प्रिंसिपल पद
के लिए
लागू भर्ती
नियमों में
गेस्ट टीचर्स
द्वारा अर्जित
अनुभव को
बाहर करने
का कोई
प्रावधान नहीं
है।
यह
तर्क
दिया
गया
कि
किसी
विज्ञापन
में
दी
गई
प्रशासनिक
शर्त
वैधानिक
भर्ती
नियमों
से
आगे
नहीं
जा
सकती
और
भर्ती
नियमों
में
मौजूद
न
होने
वाली
कोई
अतिरिक्त
अयोग्यता
नहीं
जोड़
सकती।
आवेदकों
ने
भर्ती नियमों
के क्लॉज
5 का
भी
सहारा
लिया,
जिसके
तहत
सरकार
आवश्यक
या
उचित
समझे
जाने
पर,
UPSC से परामर्श
करके,
किसी
वर्ग
या
श्रेणी
के
व्यक्तियों
के
संबंध
में
नियमों
के
प्रावधानों
में
छूट
दे
सकती
है।
उनकी
ओर
से
कहा
गया
कि
नियम
स्वयं
उचित
मामलों
में
लचीलापन
प्रदान
करते
हैं
और
केवल
नियुक्ति
के
नाम
या
स्वरूप
के
आधार
पर
उनके
अनुभव
को
पूर्ण
रूप
से
बाहर
करने
का
समर्थन
नहीं
करते।
‘गेस्ट
टीचर’
को स्वतः
‘विजिटिंग गेस्ट
फैकल्टी’
नहीं माना
जा सकता
मामले
का
एक
महत्वपूर्ण
पहलू
यह
है
कि
शिक्षा निदेशालय
द्वारा लगातार
नियुक्त गेस्ट
टीचर और
केवल
विजिटिंग अथवा
गेस्ट फैकल्टी
के
रूप
में
कार्य
करने
वाले
व्यक्ति
के
बीच
अंतर
है।
आवेदकों
की
ओर
से
दलील
दी
गई
कि
विजिटिंग
फैकल्टी
सामान्यतः
कभी-कभार
या
प्रति
लेक्चर
के
आधार
पर
नियुक्त
हो
सकती
है,
जबकि
दिल्ली
सरकार
के
गेस्ट
टीचर्स
नियमित
रूप
से
शिक्षण
कार्य
करते
हैं
और
उन्हें
मासिक
पारिश्रमिक
दिया
जाता
है।
इसलिए
केवल
उनकी
नियुक्ति
का
नाम
“गेस्ट टीचर”
होने
के
कारण
उनके
शिक्षण
अनुभव
को
नजरअंदाज
नहीं
किया
जा
सकता।
याचिका
में
यह
भी
कहा
गया
कि
आवेदक
स्वीकृत शिक्षण
पदों के
विरुद्ध कार्य
कर रहे
हैं और
उनकी
तुलना
केवल
आकस्मिक,
अस्थायी
या
जरूरत
के
आधार
पर
नियुक्त
व्यक्तियों
से
नहीं
की
जा
सकती।
CAT ने
कहा—आवेदकों
की दलील
को ‘इस
स्तर पर
खारिज नहीं
किया जा
सकता’
दोनों
पक्षों
को
सुनने
के
बाद
ट्रिब्यूनल
ने
मुख्य
प्रश्न
की
पहचान
की—क्या
लगातार कार्य
करने वाले
और मासिक
पारिश्रमिक प्राप्त
करने वाले
गेस्ट टीचर्स
का अनुभव
UPSC
विज्ञापन में
उल्लिखित “विजिटिंग
गेस्ट फैकल्टी”
के अनुभव
के समान
माना जा
सकता है?
पीठ
ने
महत्वपूर्ण
टिप्पणी
की:
“प्रथम
दृष्टया,
आवेदकों की
यह दलील
कि भर्ती
नियमों में
गेस्ट टीचर्स
द्वारा अर्जित
अनुभव को
स्पष्ट रूप
से बाहर
नहीं किया
गया है,
इस स्तर
पर खारिज
नहीं की
जा सकती।”
हालांकि,
ट्रिब्यूनल
ने
स्पष्ट
किया
कि
उसने
अभी
इस
विवाद
पर
अंतिम
निर्णय
नहीं
दिया
है।
उसने
प्रतिवादियों
की
इस
दलील
को
भी
विचार
योग्य
माना
कि
विज्ञापन
में
दी
गई
शर्तें
केवल
स्पष्टीकरणात्मक
हैं
और
उन्हें
भर्ती
नियमों
के
साथ
पढ़ा
जाना
चाहिए।
पीठ
ने
कहा
कि
विज्ञापन
की
शर्तों
और
भर्ती
नियमों,
विशेष
रूप
से
क्लॉज
5,
के
बीच
संबंध
पर
प्रतिवादियों
का
जवाब
हलफनामे
पर
आने
के
बाद
विस्तार
से
विचार
किया
जाएगा।
क्या
लगातार कार्यरत
गेस्ट टीचर्स
‘विजिटिंग गेस्ट
फैकल्टी’
के दायरे
में आते
हैं—इस
पर फैसला
बाकी
ट्रिब्यूनल
ने
यह
भी
कहा
कि
उसे
यह
तय
करना
होगा
कि
“विजिटिंग
गेस्ट फैकल्टी”
शब्द
का
दायरा
इतना
व्यापक
है
या
नहीं
कि
उसमें
शिक्षा
निदेशालय
द्वारा
लगातार
नियुक्त
और
मासिक
पारिश्रमिक
प्राप्त
करने
वाले
गेस्ट
टीचर्स
भी
शामिल
हो
जाएं।
पीठ
के
अनुसार,
इसका
उत्तर
भर्ती
नियमों
की
योजना,
आवेदकों
की
नियुक्ति
की
वास्तविक
प्रकृति
तथा
विवादित
भर्ती
निर्देश
के
सही
अर्थ
और
दायरे
पर
निर्भर
करेगा।
इस
टिप्पणी
का
महत्व
इसलिए
भी
है
क्योंकि
इससे
यह
बड़ा
कानूनी
प्रश्न
खुला
रहता
है
कि
केवल
“गेस्ट” शब्द
समान
होने
के
आधार
पर
लंबे
समय
से
कार्यरत
गेस्ट
टीचर्स
को
कभी-कभार
कार्य
करने
वाली
विजिटिंग
फैकल्टी
के
समान
माना
जा
सकता
है
या
नहीं।
UPSC ने
अंतरिम राहत
का विरोध
किया
UPSC ने
अंतरिम
राहत
का
विरोध
करते
हुए
मूल
आवेदन
की
विचारणीयता
पर
भी
प्रारंभिक
आपत्ति
उठाई।
प्रतिवादियों
ने
तर्क
दिया
कि
विज्ञापन
में
दी
गई
शर्तें
केवल
स्पष्टीकरणात्मक और
स्पष्टकारी हैं
तथा
उन्हें
भर्ती
नियमों
के
साथ
सामंजस्यपूर्ण
रूप
से
पढ़ा
जाना
चाहिए।
उनका
यह
भी
कहना
था
कि
भर्ती
विज्ञापन
का
हिस्सा
होने
के
कारण
ये
निर्देश
उम्मीदवारों
पर
बाध्यकारी
हैं
और
केवल
यह
स्पष्ट
करते
हैं
कि
शॉर्टलिस्टिंग
के
लिए
आवश्यक
अनुभव
की
गणना
किस
प्रकार
की
जाएगी।
ट्रिब्यूनल
ने
इस
तर्क
को
अभी
न
तो
स्वीकार
किया
और
न
ही
खारिज
किया।
उसने
कहा
कि
प्रतिवादियों
के
विस्तृत
जवाब
के
बाद
इस
मुद्दे
पर
विचार
किया
जाएगा।
आवेदन
की अंतिम
तिथि के
कारण अंतरिम
संरक्षण
ट्रिब्यूनल
के
समक्ष
एक
महत्वपूर्ण
तथ्य
यह
भी
था
कि
आवेदन
जमा
करने
की
अंतिम तिथि
14
अगस्त 2026 थी।
आवेदकों
का
तर्क
था
कि
यदि
उन्हें
अभी
चयन
प्रक्रिया
में
भाग
लेने
से
रोक
दिया
गया
और
बाद
में
वे
मुकदमे
में
सफल
हो
गए,
तो
इस
दौरान
खोए
अवसर
की
प्रभावी
रूप
से
भरपाई
नहीं
की
जा
सकेगी।
CAT ने
इस
चिंता
में
दम
पाया
और
कहा
कि
यदि
अभी
भाग
लेने
से
रोक
दिया
गया
तथा
आवेदक
बाद
में
सफल
होते
हैं,
तो
उन्हें
होने
वाली
क्षति
ऐसी
हो
सकती
है
जिसकी
पर्याप्त भरपाई
संभव न
हो।
इसी
आधार
पर
ट्रिब्यूनल
ने
माना
कि
सुविधा का
संतुलन आवेदकों
को चयन
प्रक्रिया में
भाग लेने
के अधिकार
की अंतरिम
सुरक्षा देने
के पक्ष
में है,
बशर्ते
उनका
अधिकार
मामले
के
अंतिम
परिणाम
के
अधीन
रहेगा।
गेस्ट
टीचर्स को
प्रिंसिपल चयन
प्रक्रिया में
भाग लेने
की अनुमति
अंतरिम
राहत
देते
हुए
CAT
ने
निर्देश
दिया:
“आवेदकों
को Advertisement
No. 51/2026 के तहत
प्रिंसिपल पद
की चयन
प्रक्रिया में
भाग लेने
की अनुमति
दी जाएगी।”
यह
निर्देश
दोनों
पक्षों
के
अधिकारों
और
दलीलों
को
प्रभावित
किए
बिना
दिया
गया
है।
मूल
आवेदन
में
विशेष
रूप
से
यह
राहत
मांगी
गई
थी
कि
आवेदकों
के
आवेदन
अस्थायी
रूप
से
स्वीकार
किए
जाएं
और
उन्हें
UPSC
द्वारा
1
नवंबर 2026 को
निर्धारित
परीक्षा
सहित
पूरी
भर्ती
प्रक्रिया
में
भाग
लेने
दिया
जाए।
नियुक्ति
का कोई
अधिकार नहीं;
परिणाम सीलबंद
लिफाफे में
रहेंगे
ट्रिब्यूनल
ने
स्पष्ट
किया
कि
अंतरिम
आदेश
के
तहत
चयन
प्रक्रिया
में
भाग
लेने
से
आवेदकों
को
नियुक्ति या
अंतिम चयन
का कोई
निहित, न्यायसंगत
अथवा अपरिहार्य
अधिकार प्राप्त
नहीं होगा।
उनकी
उम्मीदवारी
और
पात्रता
मूल
आवेदन
के
अंतिम
निर्णय
के
अधीन
रहेगी।
इसके
अतिरिक्त
CAT
ने
निर्देश
दिया
कि
आवेदकों
के
परिणाम,
यदि
कोई
हों,
सीलबंद लिफाफे
में रखे
जाएं और
ट्रिब्यूनल की
अनुमति के
बिना उन्हें
न खोला
जाए और
न उन
पर कोई
कार्रवाई की
जाए।
इस
प्रकार
आदेश
ने
एक
ओर
आवेदकों
के
चयन
प्रक्रिया
में
भाग
लेने
के
अवसर
को
सुरक्षित
रखा
है,
वहीं
दूसरी
ओर
पात्रता
विवाद
का
अंतिम
फैसला
होने
से
पहले
किसी
प्रकार
का
अंतिम
अधिकार
उत्पन्न
होने
से
भी
रोका
है।
आवेदकों
का दावा—दिल्ली
सरकार ने
स्वयं गेस्ट
टीचर्स के
अनुभव को
मान्यता दी
है
मूल
आवेदन
में
कई
तथ्यों
का
उल्लेख
करते
हुए
यह
दावा
किया
गया
है
कि
दिल्ली
सरकार
ने
स्वयं
गेस्ट
टीचर्स
के
अनुभव
को
मान्यता
दी
है।
याचिका
के
अनुसार,
सरकार
के
11
जून 2019
के ऑफिस
मेमोरेंडम में
यह
प्रावधान
है
कि
यदि
किसी
गेस्ट
टीचर
ने
किसी
शैक्षणिक
वर्ष
में
कम
से
कम
120
दिन कार्य
किया है,
तो उसे
एक वर्ष
का शिक्षण
अनुभव माना
जाएगा।
याचिका
में
शिक्षा
निदेशालय
द्वारा
2023
में
दिल्ली
हाई
कोर्ट
में
दाखिल
उस
हलफनामे
का
भी
उल्लेख
किया
गया
है,
जिसमें
यह
स्वीकार
किया
गया
था
कि
गेस्ट
टीचर्स
स्वीकृत
शिक्षण
पदों
के
विरुद्ध
कार्य
कर
रहे
हैं।
आवेदकों
ने
यह
भी
कहा
कि
शिक्षा
निदेशालय
ने
स्वयं
उन्हें
उच्च
शिक्षण
एवं
प्रशासनिक
पदों
की
भर्ती
में
भाग
लेने
के
लिए
अनुभव
प्रमाणपत्र
जारी
किए
हैं,
जो
उनके
अनुसार
गेस्ट
टीचर
के
रूप
में
अर्जित
शिक्षण
अनुभव
की
सरकारी
मान्यता
को
दर्शाता
है।
हालांकि,
इन
दलीलों
पर
ट्रिब्यूनल
का
अंतिम
निर्णय
अभी
होना
बाकी
है।
लंबे
समय से
कार्यरत गेस्ट
टीचर्स के
लिए मामले
के व्यापक
प्रभाव हो
सकते हैं
यह
मामला
उन
गेस्ट
टीचर्स
को
प्रभावित
करने
वाला
एक
बड़ा
प्रश्न
उठाता
है
जो
वर्षों
से
सरकारी
स्कूलों
में
कार्यरत
हैं—क्या
वास्तविक और
महत्वपूर्ण शिक्षण
अनुभव को
केवल इसलिए
नजरअंदाज किया
जा सकता
है क्योंकि
शिक्षक की
नियुक्ति को
“गेस्ट”
कहा गया
है?
आवेदकों
का
कहना
है
कि
स्वीकृत
पदों
पर
नियमित
शिक्षण
कार्य
करते
हुए
अर्जित
निरंतर
अनुभव
की
तुलना
विजिटिंग
फैकल्टी
की
अंतराल
पर,
आकस्मिक
अथवा
प्रति
लेक्चर
नियुक्ति
से
नहीं
की
जा
सकती।
अंतिम
निर्णय
का
प्रभाव
वर्तमान
आवेदकों
से
आगे
भी
जा
सकता
है,
विशेष
रूप
से
उन
लंबे
समय
से
कार्यरत
गेस्ट
टीचर्स
पर
जो
ऐसे
वरिष्ठ
शैक्षणिक
और
प्रशासनिक
पदों
पर
पदोन्नति
या
सीधी
भर्ती
चाहते
हैं,
जिनके
भर्ती
नियम
न्यूनतम
शिक्षण
अनुभव
तो
निर्धारित
करते
हैं
लेकिन
उसे
केवल
नियमित
या
स्थायी
सेवा
तक
सीमित
नहीं
करते।
फिलहाल
CAT
ने
केवल
सीमित अंतरिम
संरक्षण दिया
है।
ट्रिब्यूनल
ने
न
तो
अंतिम
रूप
से
यह
घोषित
किया
है
कि
गेस्ट
टीचर
का
अनुभव
प्रिंसिपल
पद
के
लिए
मान्य
अनुभव
है
और
न
ही
UPSC
की
विवादित
शर्त
को
अंतिम
रूप
से
अवैध
ठहराया
है।
प्रतिवादियों
को चार
सप्ताह में
जवाब दाखिल
करने का
निर्देश
ट्रिब्यूनल
ने
प्रतिवादियों
को
नोटिस
जारी
कर
चार सप्ताह
के भीतर
विस्तृत काउंटर-अफिडेविट
दाखिल करने
का
निर्देश
दिया
है।
इसके
बाद
आवेदकों
को
दो सप्ताह
के भीतर
रिजॉइंडर दाखिल
करने
की
अनुमति
दी
गई
है।
दोनों
पक्षों
को
अंतरिम
आदेश
में
बदलाव,
संशोधन,
स्पष्टीकरण
अथवा
उसे
निरस्त
कराने
के
लिए
आवेदन
करने
की
स्वतंत्रता
भी
दी
गई
है।
मामले
की
अगली
सुनवाई
27
अक्टूबर 2026 को
होगी।
मामला:
Anuja
Sharma & Ors. v. Union Public Service Commission (UPSC) & Ors.
मामला संख्या:
O.A. No. 3000/2026
न्यायालय:
केंद्रीय
प्रशासनिक
अधिकरण,
प्रधान
पीठ,
नई
दिल्ली
पीठ:
मनीष
गर्ग,
सदस्य
(न्यायिक) एवं
डॉ.
आनंद
एस.
खाती,
सदस्य
(प्रशासनिक)
आदेश की
तारीख:
12 अगस्त 2026
संबंधित पद:
प्रिंसिपल,
शिक्षा
निदेशालय,
GNCTD
विज्ञापन:
UPSC Advertisement No. 51/2026
प्रिंसिपल के
पद:
124
अगली सुनवाई:
27 अक्टूबर 2026
https://advocateanujaggarwal.com/home.php
https://judgmentslaw.blogspot.com/2026/08/cat-relief-for-delhi-guest-teachers-in.html
अनुज
अग्रवाल
अधिवक्ता
K-17, द्वितीय तल,
जंगपुरा
एक्सटेंशन,
नई
दिल्ली
– 110014
483, ब्लॉक-2,
लॉयर्स
चैंबर्स,
दिल्ली
हाई
कोर्ट,
नई
दिल्ली
– 110003
मोबाइल
– 9891403206
लैंडलाइन
– 011-35554905
ईमेल
– anujaggarwal1984@gmail.com


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